ऑनलाइन सट्टेबाजी में छत्तीसगढ़ टॉप पर, सख्ती की मांग
रिपोर्टर मयंक गुप्ता
रायपुर / 8 अक्टूबर 2025 (विशेष संवाददाता) छत्तीसगढ़ के शिक्षा विभाग में फैले भ्रष्टाचार ने अब नया रूप ले लिया है। राजधानी रायपुर सहित कई जिलों में फर्जी दस्तावेजों के सहारे सरकारी नौकरियों का बड़ा खेल सामने आया है, जिससे विभाग की विश्वसनीयता पर गहरा सवाल खड़ा हो गया है। पुलिस ने इस मामले में तत्काल जांच शुरू कर दी है, जिसमें कई वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध बताई जा रही है। दूसरी ओर, राज्य में ऑनलाइन सट्टेबाजी के अवैध कारोबार ने चरम पर पहुंचकर चिंता बढ़ा दी है। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड्स ब्यूरो (एनसीआरबी) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, छत्तीसगढ़ इस मामले में देश में नंबर वन पर है, जिसके खिलाफ विपक्ष और सामाजिक संगठनों ने सख्त कार्रवाई की मांग तेज कर दी है।
फर्जी नियुक्तियों का जाल: आयोग के नाम पर चला सवा चार साल का खेल
शिक्षा विभाग में यह घोटाला 2021 से ही पनप रहा था, लेकिन अब जाकर इसका पर्दाफाश हुआ है। छत्तीसगढ़ राज्य शिक्षा आयोग के नाम पर जारी किए गए कूटरचित पत्रों के जरिए कई कर्मचारियों की नियुक्तियां की गईं, जबकि आयोग ने स्पष्ट कर दिया है कि उसने कभी ऐसी कोई भर्ती प्रक्रिया शुरू ही नहीं की। जांच में सामने आया कि 9 सितंबर 2021 का एक फर्जी नियुक्ति आदेश आयोग के तत्कालीन सचिव ओ.पी. मिश्रा के नाम से जारी किया गया था। इसमें 2016 का राजपत्र दिखाया गया, जबकि आयोग की स्थापना तो 2017 में ही हुई थी। व्यापम जैसी परीक्षा और भर्ती अनुमति के नाम पर सब कुछ झूठा साबित हुआ।
इस घोटाले की जड़ें समग्र शिक्षा विभाग तक फैली हुई हैं, जहां 70 से 100 करोड़ रुपये का कथित घपला हुआ। निजी कंपनियों को ठेके देकर फर्जी दस्तावेजों पर 2-3 लाख रुपये लेकर नियुक्तियां बांटी गईं। एनएसयूआई जैसे संगठनों ने आरोप लगाया है कि भर्ती नियमों का खुला उल्लंघन किया गया, और विभागीय अधिकारियों ने आंखें मूंद लीं। व्यावसायिक शिक्षक भर्ती में भी इसी तरह की अनियमितताएं पाई गईं, जहां शिकायतों के बाद भर्ती पर रोक लगानी पड़ी।
स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा, "विद्यार्थियों के भविष्य से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं होगा। दोषी अधिकारी हों या कर्मचारी, सभी पर कड़ी कार्रवाई होगी।" विभाग ने राज्य परियोजना कार्यालय समग्र शिक्षा को निर्देशित किया है कि सभी दस्तावेजों की जांच हो और दोषियों के खिलाफ तुरंत कानूनी कदम उठाए जाएं। एक तीन सदस्यीय जांच समिति पहले ही गठित हो चुकी है, जिसकी रिपोर्ट में कई कंपनियों और अधिकारियों के नाम उभर आए हैं। पुलिस की साइबर सेल भी फर्जी दस्तावेजों की डिजिटल जांच में जुटी है, और संभावना है कि जल्द ही कई गिरफ्तारियां हों।
यह घोटाला न केवल सरकारी खजाने को खोखला कर रहा है, बल्कि हजारों योग्य अभ्यर्थियों के सपनों पर भी भारी पड़ रहा है। अभ्यर्थी संगठनों ने चेतावनी दी है कि अगर दोषियों पर त्वरित कार्रवाई नहीं हुई, तो वे रायपुर में बड़े आंदोलन पर उतर आएंगे।
ऑनलाइन सट्टेबाजी का काला कारोबार: छत्तीसगढ़ शीर्ष पर, युवाओं का भविष्य खतरे में
शिक्षा घोटाले के साथ ही राज्य में एक और गंभीर समस्या ने जोर पकड़ लिया है – ऑनलाइन सट्टेबाजी। एनसीआरबी की 2023 की रिपोर्ट (जो हाल ही में पेश की गई) के अनुसार, छत्तीसगढ़ देश में ऑनलाइन जुआ-सट्टे के मामलों में प्रथम स्थान पर काबिज है। आईपीएल जैसे क्रिकेट मैचों के दौरान यह कारोबार चरम पर पहुंच जाता है, जहां लाखों रुपये का मशरूका जब्त किया जाता है। भाजपा नेता केदार गुप्ता ने पूर्व कांग्रेस सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, "भूपेश राज में इसकी जड़ें मजबूत हुईं। 600-700 लोगों पर कार्रवाई हुई, लेकिन सेंट्रल गवर्नमेंट के एप्स को बंद करने की जरूरत है।"
पुलिस ने इस साल कई बड़ी कार्रवाइयां की हैं। अप्रैल में दिल्ली के द्वारका में छत्तीसगढ़ के 5 युवाओं समेत 6 सटोरियों को गिरफ्तार किया गया, जहां 'कबूक' पैनल के जरिए ऑनलाइन सट्टा चलाया जा रहा था। इसी तरह, महादेव ऐप जैसे प्लेटफॉर्म्स पर झारखंड और छत्तीसगढ़ के युवा फंसते नजर आ रहे हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने गूगल और मेटा को नोटिस जारी कर ऐप्स के प्रमोशन पर सवाल उठाए हैं, क्योंकि इनके जरिए करोड़ों की काली कमाई हो रही है।
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने भी इस मुद्दे पर सख्त रुख अपनाया है। मार्च में एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने गृह विभाग के सचिव से व्यक्तिगत हलफनामा मांगा और प्रतिबंधित कंपनियों को नोटिस जारी किया। जुलाई में सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ सहित गुजरात व महाराष्ट्र के मामलों को अपने पास बुला लिया, जिससे उम्मीद है कि राष्ट्रीय स्तर पर सख्त कानून बनेगा। राज्य में 2023 से ही जुआ प्रतिषेध विधेयक लागू है, जिसमें 7 साल की सजा और 10 लाख जुर्माने का प्रावधान है, लेकिन उल्लंघन थमने का नाम नहीं ले रहा।
सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह समस्या युवाओं को आर्थिक रूप से बर्बाद कर रही है। एक सर्वे के मुताबिक, राज्य के 40% से अधिक युवा ऐसे ऐप्स के चपेट में हैं, जो परिवारों को तबाह कर रहे हैं। विपक्ष ने विधानसभा में विशेष सत्र बुलाने की मांग की है, ताकि साइबर क्राइम यूनिट को मजबूत किया जाए।
आगे की राह पारदर्शिता और सख्ती जरूरी
ये दोनों मामले छत्तीसगढ़ की प्रशासनिक व्यवस्था पर सवालिया निशान लगा रहे हैं। शिक्षा विभाग में पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया और डिजिटल वेरिफिकेशन सिस्टम लागू करने की जरूरत है, जबकि सट्टेबाजी के खिलाफ केंद्र-राज्य समन्वय से साइबर निगरानी बढ़ानी होगी। सरकार ने आश्वासन दिया है कि जांच पूरी होते ही दोषियों को सलाखों के पीछे पहुंचाया जाएगा। लेकिन जनता का विश्वास तभी बहाल होगा, जब कार्रवाई दिखेगी। फिलहाल, रायपुर की सड़कों पर विरोध के स्वर तेज हो रहे हैं – क्या सरकार सुन पाएगी..?
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