बागबाहरा में ऐतिहासिक समारोह
रिपोर्टर मयंक गुप्ता
बागबाहरा (महासमुंद), 15 नवंबर 2025: धरतीपुत्र भगवान बिरसा मुंडा की जयंती पर मनाए जा रहे जनजातीय गौरव दिवस को जनपद पंचायत बागबाहरा ने एक ऐतिहासिक और प्रेरणादायी आयोजन में बदल दिया। सैकड़ों की संख्या में एकत्रित आदिवासी भाई-बहन, जनप्रतिनिधि, अधिकारी और ग्रामीणों के बीच मुख्य अतिथि जनपद अध्यक्ष केशव चंद्राकर ने न केवल वीर नारायण सिंह और वीर गुंडाधुर को सलाम किया, बल्कि सभी को उनके आदर्शों पर चलते हुए समाज-सेवा की शपथ दिलाई।
यह आयोजन सिर्फ एक औपचारिकता नहीं, बल्कि आदिवासी अस्मिता, संघर्ष और विकास की नई गाथा का साक्षी बना।
सुबह से शुरू हुआ उत्साह, शाम तक गूंजती रहीं जयकारें
सुबह 10 बजे से ही जनपद परिसर में पारंपरिक ढोल-मांदर की थाप और बिरसा मुंडा, वीर नारायण सिंह व गुंडाधुर के नारे गूंजने लगे। कार्यक्रम स्थल को आदिवासी संस्कृति की झलक से सजाया गया था। मंच के ठीक सामने तीनों नायकों की विशाल प्रतिमाएं स्थापित की गईं, जिनके सामने पुष्पांजलि और दीप प्रज्वलन के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ।
मुख्य अतिथि केशव चंद्राकर का धमाकेदार आगमन
जैसे ही जनपद अध्यक्ष केशव चंद्राकर का काफिला परिसर में दाखिल हुआ, पूरा सभागार तालियों और नारों से गूंज उठा। केशव चंद्राकर ने सबसे पहले बिरसा मुंडा की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया और दो मिनट का मौन रखकर तीनों नायकों को श्रद्धांजलि दी।
नायकों की गाथा सीईओ ने सुनाई अनसुनी कहानियां
जनपद सीईओ एम.एल. मंडावी और एडिशनल सीईओ जी.आर. बरिहा ने मंच पर आकर पावरपॉइंट प्रेजेंटेशन के जरिए नायकों की कहानियां सुनाईं:
कैसे बिरसा मुंडा ने ब्रिटिश नीतियों के खिलाफ विद्रोह का बिगुल फूंका।
कैसे वीर नारायण सिंह ने 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में छत्तीसगढ़ का नेतृत्व किया।
कैसे गुंडाधुर ने 1910 में बस्तर विद्रोह की कमान संभाली।
क्लाइमेक्स: केशव चंद्राकर ने दिलाई ऐतिहासिक शपथ
मुख्य अतिथि केशव चंद्राकर ने मंच पर आते ही तीनों नायकों को "राष्ट्रनायक" घोषित किया। फिर दाहिना हाथ उठाकर पूरे सभागार को यह शपथ दिलाई:
"मैं शपथ लेता हूं कि बिरसा, नारायण और गुंडाधुर के आदर्शों को जीवन में उतारूंगा।
समाज में भाईचारा बढ़ाऊंगा।
जनहित के हर कार्य में हिस्सा लूंगा।
आदिवासी संस्कृति को संरक्षित करूंगा।"
सैकड़ों लोगों ने एक स्वर में शपथ दोहराई – यह दृश्य ऐतिहासिक था।
सम्मान समारोह आदि कर्मयोगी सम्मानित
आयोजन का सबसे हृदयस्पर्शी हिस्सा रहा सम्मान समारोह। मुख्य अतिथि केशव चंद्राकर ने स्वयं महिला कर्मियों को शॉल, श्रीफल और प्रशस्ति पत्र भेंट किए।
आदि कर्मयोगी अभियान में उत्कृष्ट कार्य के लिए सम्मानित होने वालों में शामिल रहीं:
मीना चंद्राकर
भावना गुप्ता
रमा अग्रवाल
जामिनी बरिहा
सरोजिनी आदित्य
नूतन ध्रुव
हीरा ध्रुव
चित्रा शर्मा
मनिका ठाकुर
शकुंतला चौहान
तुलेश्वरी खूंटे
सीमा नायक
रूपा पारेशर
केशव चंद्राकर ने कहा, "ये महिलाएं ही असली बिरसा मुंडा हैं – समाज के लिए लड़ रही हैं।"
महिला अधिकारी मीना चंद्राकर का संदेश
मीना चंद्राकर ने कहा:
"जनजातीय गौरव दिवस संस्कृति का उत्सव है। हमें अपनी परंपरा को अगली पीढ़ी तक पहुंचाना है।"
संचालन में कमाल ऐकाल देव निषाद की तारीफ
ऐकाल देव निषाद ने हिंदी और छत्तीसगढ़ी में संचालन कर सबका दिल जीत लिया। उनकी कविता पंक्तियां – "बिरसा की हुंकार, नारायण का बलिदान, गुंडाधुर का पराक्रम – यही हमारा सम्मान" – ने बार-बार तालियां बटोरीं।
समापन: ढोल की थाप पर नाच और जोहार
कार्यक्रम का समापन आदिवासी नृत्य और "जय बिरसा, जय जोहार" के नारों के साथ हुआ।
केशव चंद्राकर ने घोषणा की:
"अगले साल जनजातीय गौरव दिवस को और भव्य बनाएंगे। हर पंचायत में बिरसा मुंडा की प्रतिमा लगेगी।"
यह आयोजन बागबाहरा के लिए एक नई शुरुआत था – जहां इतिहास ने वर्तमान को दिशा दी और भविष्य को प्रेरणा।
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