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Saturday, August 30, 2025

किसानों को मिलेगा बड़ा मुनाफा प्रमाणित बीज उत्पादन से पंजीयन की आगामी आखिरी तारीख 31 अगस्त को

रिपोर्टर मयंक गुप्ता महासमुंद / लभरा खुर्द अगर आप भी खेती से ज्यादा कमाई करना चाहते हैं तो प्रमाणित बीज उत्पादन आपके लिए एक बेहतरीन मौका है। छत्तीसगढ़ राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम हर साल खरीफ मौसम में किसानों को बीज उत्पादन कार्यक्रम में शामिल करता है। इस योजना से जुड़कर किसान सामान्य फसल उत्पादन की तुलना में ज्यादा मुनाफा कमा सकते हैं। अगर आप भी इस योजना से जुड़ना चाहते हैं तो ध्यान रखें कि पंजीयन की आखिरी तारीख 31 अगस्त है। तो फिर देर किस बात की। बीज प्रंबधक-ईशाक सोना मोबाईल 70490 97975,सहायक बीज प्रमाणीकरण अधिकारी-चंद्रकांत वर्मा मोबाईल 73544 79987 से तुरंत संपर्क करे।

विशेषज्ञों के अनुसार प्रमाणित बीज से सामान्य बीज की तुलना में 10 से 15 फीसदी तक अधिक उपज मिलती है। यही वजह है कि कृषि विभाग लगातार किसानों को प्रमाणित बीज उपयोग करने और बीज उत्पादन कार्यक्रम से जुड़ने के लिए प्रेरित करता है। इस कार्यक्रम में वही किसान शामिल हो सकते हैं जिनके पास कम से कम 2.5 एकड़ जमीन है। पंजीयन के लिए उन्हें अपने जिले के बीज प्रक्रिया केंद्र में मामूली शुल्क के साथ आवेदन करना होगा। पंजीयन के बाद बीज प्रमाणीकरण अधिकारी किसानों को पूरी प्रक्रिया समझाते हैं।

फसल कटाई के बाद किसान जब बीज प्रक्रिया केंद्र में अपना उत्पादन जमा कराते हैं तो एक सप्ताह में उन्हें बीज की कुल कीमत का लगभग 60 प्रतिशत अग्रिम भुगतान कर दिया जाता है। शेष 40 प्रतिशत राशि बीज की जांच रिपोर्ट आने के बाद दी जाती है। इसमें लगभग दो महीने का समय लगता है। पिछले खरीफ में बीज उत्पादन करने वाले किसानों को बाजार दर से काफी ज्यादा दाम मिले। उदाहरण के तौर पर धान की मोटी किस्म पर 3843 रुपये, पतली किस्म पर 4011 रुपये और सुगंधित किस्म पर 4444 रुपये प्रति क्विंटल का दाम मिला। जबकि सामान्य समर्थन मूल्य सिर्फ 3100 रुपये प्रति क्विंटल था। इसका मतलब किसानों को मोटे धान में ही करीब 743 रुपये प्रति क्विंटल ज्यादा फायदा हुआ। एक एकड़ में यह लाभ लगभग 15,603 रुपये और एक हेक्टेयर में करीब 40,000 रुपये तक पहुंच गया। हालांकि बीज की शेष 40 प्रतिशत राशि मिलने में 2 से ढाई माह का समय लगता है, लेकिन फिर भी यह खेती का सबसे ज्यादा लाभकारी विकल्प माना जा रहा है। अभी शासन स्तर पर इस पर मिलने वाले अनुदान को और बढ़ाने पर विचार हो रहा है।

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