शहर में उमड़ेगा जन शैलाब उत्साह और भक्ति का माहौल, गरबा नाईट समिति के तत्वाधान में आयोजित होगी चुनरी यात्रा
रिपोर्टर मयंक गुप्ता महासमुंद/ शहर में नवरात्रि पर्व के पावन अवसर पर गरबा नाईट समिति के तत्वावधान में विगत 13 वर्षों से आयोजित होने वाली भव्य चुनरी यात्रा इस वर्ष 27 सितंबर 2025 को आयोजित की जाएगी। यह जानकारी समिति के सदस्य नीरज परोहा ने दी। उन्होंने बताया कि यह यात्रा शहर के मुख्य मार्गों से होकर गुजरेगी और नगर की कुलदेवी माँ महामाया को चुनरी अर्पित की जाएगी। इस आयोजन का संयोजन शहर की पूर्व पालिकाध्यक्ष श्रीमती राशि त्रिभुवन महिलांग के नेतृत्व में किया जा रहा है।चुनरी यात्रा का भव्य आयोजन
चुनरी यात्रा का शुभारंभ 27 सितंबर को शाम 5 बजे स्थानीय हाई स्कूल मैदान से होगा। यह यात्रा शहर के प्रमुख मार्गों से होते हुए माँ महामाया मंदिर तक पहुंचेगी, जहां माता को चुनरी अर्पित की जाएगी। नीरज परोहा ने बताया कि इस आयोजन में शहर के वरिष्ठ नागरिकों और समाजसेवी व्यक्तियों का मार्गदर्शन प्राप्त हो रहा है, जो इस कार्यक्रम की गरिमा को और बढ़ाता है।तैयारियां पूर्ण, मातृ शक्ति और पुरुषों के लिए विशेष व्यवस्था
समिति के सदस्य नीरज परोहा ने बताया कि चुनरी यात्रा की सभी तैयारियां श्रीमती राशि त्रिभुवन महिलांग के दिशा-निर्देशों के अनुसार पूर्ण कर ली गई हैं। यात्रा में शामिल होने वाले मातृ शक्ति (महिलाओं) और पुरुषों के लिए अलग-अलग वेशभूषा का निर्धारण किया गया है, ताकि आयोजन में एकरूपता और भव्यता बनी रहे। समिति ने यह भी सुनिश्चित किया है कि यात्रा के दौरान सभी व्यवस्थाएं सुचारू रूप से संचालित हों।प्रशासन से सहयोग की अपेक्षा
गरबा नाईट समिति ने इस आयोजन को सफल बनाने के लिए जिला प्रशासन से पूर्ण सहयोग की अपेक्षा व्यक्त की है। विगत वर्षों की तरह इस बार भी प्रशासन के सहयोग से यात्रा को भव्य और व्यवस्थित रूप से संपन्न करने की योजना है। समिति ने सुरक्षा, यातायात व्यवस्था और अन्य आवश्यक सुविधाओं के लिए प्रशासन के साथ समन्वय स्थापित किया है।संयोजक की अपील: सभी नगरवासियों को निमंत्रण
चुनरी यात्रा की संयोजक और पूर्व पालिकाध्यक्ष श्रीमती राशि त्रिभुवन महिलांग ने शहरवासियों और आसपास के क्षेत्रों के निवासियों से इस भव्य आयोजन में शामिल होने की अपील की है। उन्होंने कहा, “यह यात्रा न केवल हमारी धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह सामाजिक एकता और भक्ति का उत्सव भी है। मैं सभी नगरवासियों और क्षेत्रवासियों से अनुरोध करती हूँ कि वे इस पवित्र आयोजन में अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराकर इसे और अधिक भव्य बनाएं।”13 वर्षों की गौरवशाली परंपरा
गरबा नाईट समिति द्वारा आयोजित यह चुनरी यात्रा पिछले 13 वर्षों से नवरात्रि के अवसर पर शहर में एक प्रमुख धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन के रूप में स्थापित हो चुकी है। यह यात्रा न केवल माँ महामाया के प्रति भक्ति का प्रतीक है, बल्कि शहरवासियों के बीच एकता और उत्साह का संचार भी करती है। इस वर्ष भी समिति ने इसे और भव्य बनाने के लिए व्यापक तैयारियां की हैं।नवरात्रि के रंग में रंगा शहर
नवरात्रि के अवसर पर शहर में उत्साह और भक्ति का माहौल है। चुनरी यात्रा के साथ-साथ शहर में गरबा और अन्य सांस्कृतिक आयोजनों की भी तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। यह आयोजन न केवल धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक एकता को भी बढ़ावा देता है। नगरवासियों और क्षेत्रवासियों से अनुरोध है कि वे इस भव्य चुनरी यात्रा में बढ़-चढ़कर हिस्सा लें और माँ महामाया के प्रति अपनी श्रद्धा अर्पित करें। यह आयोजन निश्चित रूप से शहर में भक्ति और उत्साह का एक अनुपम संगम प्रस्तुत करेगा।कुलदेवी राजराजेश्वरी महामाया से जुड़ी कुछ तथ्यात्मक बाते
नगर की कुलदेवी राजराजेश्वरी महामाया के पावन दरबार में इस वर्ष शारदीय नवरात्र का भव्य आयोजन के शुभ अवसर पर प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी भव्य माता की चुनरी यात्रा निकाली जाएगीलाखों श्रद्धालुओं की उमड़ती भीड़
शहर के मध्य स्थित प्राचीन महामाया मंदिर में नवरात्र के दौरान प्रतिवर्ष दूर-दूर से भक्त बड़ी संख्या में पहुंचते हैं। अनुमान है कि इस बार भी लाखों श्रद्धालु दर्शन व पूजन के लिए यहाँ उपस्थित होंगे। खास बात यह है कि यहां स्त्रियों की उपस्थिति पुरुषों से कहीं अधिक रहती है। हर साल की तरह इस बार भी सभी धर्मों और समुदायों के लोग उत्साहपूर्वक भाग लेंगे, जिससे सर्वधर्म समभाव का अद्भुत दृश्य दिखाई देगा।परंपराओं में बदलाव और इतिहास
पुरानी पीढ़ी के लोग बताते हैं कि कई दशक पहले यहां महिलाओं को मंदिर में प्रवेश करने की अनुमति नहीं थी। ऐसी मान्यता थी कि देवी के दर्शन से स्त्रियां निसंतान हो सकती हैं या गर्भस्थ शिशु को हानि हो सकती है। समय के साथ यह धारणा पूरी तरह समाप्त हो चुकी है। अब माता को “शापमोचनी” के रूप में पूजा जाता है और निःसंतान दंपति संतान प्राप्ति की कामना से यहाँ विशेष अनुष्ठान करते हैं।एक समय पर यहां पशु बलि की परंपरा भी थी, लेकिन अहिंसा आंदोलन के बाद यह प्रथा पूरी तरह समाप्त कर दी गई। आज मंदिर अपनी भव्यता और शांतिपूर्ण वातावरण के लिए प्रसिद्ध है।

No comments:
Post a Comment