
रिपोर्टर मयंक गुप्ता
बचेली / 9 अक्टूबर 2025 (विशेष संवाददाता) छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले के बचेली में स्थित डीएवी पब्लिक स्कूल में प्रिंसिपल चेतना शर्मा के कथित तानाशाही रवैये के खिलाफ शिक्षकों और अभिभावकों का गुस्सा सड़कों पर फूट पड़ा। सोमवार को सैकड़ों शिक्षकों, अभिभावकों और स्थानीय लोगों ने स्कूल प्रबंधन के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया, जिसमें प्रिंसिपल को तत्काल हटाने की मांग की गई। प्रदर्शन के दौरान स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई कि एक महिला शिक्षिका मानसिक दबाव के चलते बेहोश होकर गिर पड़ीं, जिन्हें तुरंत स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया गया। शिक्षकों और जनप्रतिनिधियों ने चेतावनी दी है कि यदि प्रिंसिपल को नहीं हटाया गया, तो पूरे बचेली में उग्र आंदोलन शुरू किया जाएगा। एनएमडीसी प्रबंधन ने मामले की जांच का आश्वासन दिया है, लेकिन प्रदर्शनकारी इस वादे पर भरोसा करने को तैयार नहीं हैं।
पांच साल की तानाशाही शिक्षकों के गंभीर आरोप
शिक्षकों ने प्रिंसिपल चेतना शर्मा पर पिछले पांच वर्षों से स्कूल में तानाशाही का माहौल कायम करने का आरोप लगाया है। प्रदर्शनकारी शिक्षकों का कहना है कि प्रिंसिपल न केवल शिक्षकों को मानसिक रूप से प्रताड़ित करती हैं, बल्कि गरीब और वंचित परिवारों के बच्चों को भी अपमानित करती हैं। एक शिक्षक ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, "चेतना शर्मा बच्चों की सामाजिक और आर्थिक पृष्ठभूमि के आधार पर उन्हें ताने मारती हैं। कई बार उन्होंने बच्चों को कहा, 'तुम्हारी औकात नहीं इस स्कूल में पढ़ने की।' शिक्षकों को भी छोटे-मोटे काम जैसे घर का राशन लाना, गाड़ी साफ करना या टॉयलेट की सफाई करने के लिए मजबूर किया जाता है।"
शिक्षकों ने यह भी आरोप लगाया कि प्रिंसिपल ने स्कूल को अपनी निजी सत्ता के रूप में चला रखा है। एक अन्य शिक्षिका ने बताया, "वह हमें धमकाती थीं कि अगर हमने उनके खिलाफ आवाज उठाई, तो हमें नौकरी से निकाल दिया जाएगा या झूठे आपराधिक मामलों में फंसाया जाएगा। हम हर दिन डर के साए में काम करते थे।" इन आरोपों ने स्कूल के माहौल को पूरी तरह बिगाड़ दिया है, जिसका सीधा असर बच्चों की शिक्षा पर पड़ रहा है।
मासूम बच्चों का दर्द: 'मेरी मां को डायन कहा'
प्रदर्शन के दौरान एक मासूम छात्र की मार्मिक बात ने सभी का ध्यान खींचा। रोते हुए छात्र ने मीडिया को बताया, "मैम ने मेरी मां को 'डायन' कहकर अपमानित किया और मुझे स्कूल से निकाल दिया। मैं पढ़ना चाहता हूं, लेकिन मुझे डर लगता है।" इस बयान ने वहां मौजूद लोगों में आक्रोश की लहर दौड़ा दी। कई अन्य अभिभावकों ने भी पुष्टि की कि उनके बच्चों को भी प्रिंसिपल द्वारा अपमान और मानसिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ा। एक अभिभावक ने कहा, "हमारे बच्चों का भविष्य दांव पर है। स्कूल में शिक्षा का माहौल खत्म हो चुका है।"
प्रबंधन की चुप्पी और शिकायतों की अनदेखी
शिक्षकों ने बताया कि 27 शिक्षकों ने मिलकर 11 नवंबर 2024 को एनएमडीसी प्रबंधन को एक विस्तृत शिकायत पत्र सौंपा था, जिसमें प्रिंसिपल के सभी कृत्यों का जिक्र था। लेकिन प्रबंधन ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। एक शिक्षक ने गुस्से में कहा, "हमने बार-बार प्रबंधन को अपनी परेशानियां बताईं, लेकिन हर बार हमें आश्वासन के अलावा कुछ नहीं मिला। अब हमारे पास सड़क पर उतरने के सिवा कोई रास्ता नहीं बचा।" प्रबंधन की इस निष्क्रियता ने शिक्षकों और अभिभावकों का आक्रोश और बढ़ा दिया।
जनप्रतिनिधियों का हस्तक्षेप जांच का आश्वासन
विवाद बढ़ता देख स्थानीय पालिका अध्यक्ष राजू जायसवाल और उपाध्यक्ष सतीश प्रेमचंदानी मौके पर पहुंचे। उन्होंने शिक्षकों और अभिभावकों की शिकायतें सुनीं और एनएमडीसी अधिकारियों से तत्काल बात की। अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि प्रिंसिपल के खिलाफ जांच शुरू की जाएगी और जांच पूरी होने तक उन्हें स्कूल आने से रोका जाएगा। लेकिन जब जनप्रतिनिधि प्रिंसिपल से बात करने पहुंचे, तो चेतना शर्मा ने बात करने से साफ इनकार कर दिया। उन्होंने कहा, "मैं डिप्रेशन की दवाइयां ले रही हूं, कोई बात नहीं करूंगी।" इस बयान पर जनप्रतिनिधियों ने कड़ा ऐतराज जताया और कहा कि ऐसी मानसिकता वाला व्यक्ति स्कूल का नेतृत्व करने के लायक नहीं है।
प्रशांत सिंह का विवादास्पद बयान
मीडिया को धमकी
मामले ने तब और तूल पकड़ा जब छत्तीसगढ़ उच्च शिक्षा विभाग (HED) के अधिकारी प्रशांत सिंह ने स्थानीय पत्रकारों को धमकाया। जब पत्रकारों ने उनसे स्कूल विवाद पर सवाल पूछे, तो सिंह भड़क गए और बोले, "मीडिया को हम कुछ नहीं समझते। जांच चल रही है, तुम कौन होते हो सवाल पूछने वाले? अपनी औकात में रहो, नहीं तो देख लेंगे।" इस बयान ने पूरे क्षेत्र में आक्रोश फैला दिया। पालिका अध्यक्ष राजू जायसवाल ने तत्काल प्रतिक्रिया देते हुए कहा, "प्रशांत सिंह का यह रवैया लोकतंत्र पर हमला है। मीडिया को धमकाना अस्वीकार्य है। हम उनके खिलाफ उच्च स्तर पर शिकायत करेंगे।"
उपाध्यक्ष सतीश प्रेमचंदानी ने भी सिंह के बयान की कड़ी निंदा की और कहा, "ऐसे अधिकारी सच को दबाना चाहते हैं। हम मांग करते हैं कि शिक्षा विभाग इस बयान पर माफी मांगे, वरना हम पूरे छत्तीसगढ़ में इसके खिलाफ आवाज उठाएंगे।" स्थानीय पत्रकार संगठनों ने भी इस घटना को प्रेस की स्वतंत्रता पर हमला करार दिया और प्रशांत सिंह के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
उग्र आंदोलन की चेतावनी
पालिका अध्यक्ष राजू जायसवाल और उपाध्यक्ष सतीश प्रेमचंदानी ने सख्त लहजे में कहा, "हम डीएवी स्कूल में बच्चों और शिक्षकों का भविष्य दांव पर नहीं लगने देंगे। चेतना शर्मा को तत्काल हटाया जाए, वरना पूरे बचेली में उग्र आंदोलन शुरू होगा। हम रैलियां निकालेंगे, धरना देंगे और जरूरत पड़ी तो रायपुर तक जाएंगे।" शिक्षक संघों ने भी इस मांग का समर्थन किया और कहा कि यह केवल एक स्कूल का मामला नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की शिक्षा व्यवस्था में व्याप्त भ्रष्टाचार और तानाशाही का प्रतीक है।
आगे की राह जांच पर टिकी नजरें
एनएमडीसी प्रबंधन ने मामले की जांच के लिए एक समिति गठित करने का वादा किया है, लेकिन शिक्षक, अभिभावक और स्थानीय लोग सतर्क हैं। उनका कहना है कि अगर जांच में देरी हुई या प्रिंसिपल को बचाने की कोशिश की गई, तो आंदोलन और तेज होगा। स्थानीय निवासियों ने भी शिक्षकों के साथ एकजुटता दिखाई है और मांग की है कि स्कूल में शिक्षा का माहौल बहाल किया जाए।
शिक्षा तंत्र में सुधार की जरूरत
यह घटना छत्तीसगढ़ के शिक्षा तंत्र में गहरी खामियों को उजागर करती है। स्कूलों में तानाशाही, शिक्षकों और बच्चों की प्रताड़ना, और प्रबंधन की उदासीनता जैसे मुद्दों ने शिक्षा के माहौल को दूषित कर दिया है। यह मामला केवल डीएवी स्कूल तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे राज्य में शिक्षा व्यवस्था में सुधार की तत्काल जरूरत को रेखांकित करता है।
निष्कर्ष
डीएवी स्कूल बचेली का यह विवाद न केवल एक स्कूल की कहानी है, बल्कि यह शिक्षा, जवाबदेही और मानवीय गरिमा का सवाल है। शिक्षकों, अभिभावकों और जनप्रतिनिधियों की एकजुटता और उनकी मांगें इस बात का संकेत हैं कि अब लोग अन्याय के खिलाफ चुप नहीं रहेंगे। अब यह देखना बाकी है कि एनएमडीसी प्रबंधन और शिक्षा विभाग इस मामले में कितनी गंभीरता से कदम उठाते हैं।
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