
महासमुंद में प्रशासन की सख्ती ग्रामीण विकास में बाधा डालने पर गिरी गाज, नया प्रभार सौंपकर योजनाओं को दी गति..!
रिपोर्टर मयंक गुप्ता
महासमुंद / 11 अक्टूबर 2025
जिला पंचायत महासमुंद के प्रशासनिक दायरे में एक बड़ी हलचल मची है, जहां ग्राम पंचायत बांसकुड़ा के सचिव जगदीश ध्रुव की लापरवाही और अनुशासनहीनता पर शासन ने कड़ी कार्रवाई की है। मुख्य कार्यपालन अधिकारी हेमंत नंदनवार के हस्ताक्षरित आदेश के तहत जगदीश ध्रुव को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। इस फैसले ने न केवल पंचायत क्षेत्र में सनसनी फैला दी है, बल्कि पूरे जिले के प्रशासनिक गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म कर दिया है। ग्रामीणों के बीच यह निर्णय एक राहत की तरह देखा जा रहा है, क्योंकि सचिव की उदासीनता से कई सरकारी योजनाएं ठप पड़ी हुई थीं।
पंचायत कार्यों में लगातार अनदेखी नियमित उपस्थिति से लेकर आदेशों की अनदेखी तक की शिकायतें..!
बांसकुड़ा पंचायत, जो आदिवासी बहुल क्षेत्र में स्थित है और शासन की कई महत्वपूर्ण योजनाओं का केंद्र बिंदु मानी जाती है, वहां सचिव जगदीश ध्रुव की जिम्मेदारियों में भारी कोताही पाई गई। सूत्रों के अनुसार, वे न केवल कार्यालय में नियमित रूप से हाजिर नहीं होते थे, बल्कि वरिष्ठ अधिकारियों के फोन कॉल्स और लिखित निर्देशों का भी कोई प्रतिसाद नहीं देते थे। इससे पंचायत स्तर पर विकास कार्यों में देरी हुई, जैसे कि मनरेगा के तहत रोजगार सृजन, प्रधानमंत्री आवास योजना के आवंटन और जल संरक्षण से जुड़ी परियोजनाएं प्रभावित हुईं।
प्रशासन ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए पहले जगदीश ध्रुव को कारण बताओ नोटिस जारी किया था, जिसमें उन्हें अपना पक्ष रखने के लिए पर्याप्त समय दिया गया। लेकिन तय समय सीमा के बाद भी कोई जवाब न मिलने पर इसे छत्तीसगढ़ पंचायत सेवा (आचरण) नियम, 1998 का स्पष्ट उल्लंघन माना गया। मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने आदेश में जोर देकर कहा कि ऐसे पदों पर तैनात कर्मचारियों से अपेक्षा की जाती है कि वे जनता की सेवा में तत्पर रहें, और किसी भी प्रकार की लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
निलंबन के दौरान मुख्यालय में तैनाती केवल निर्वाह भत्ता, कोई अतिरिक्त सुविधा नहीं..!
निलंबन की अवधि के दौरान जगदीश ध्रुव को जिला पंचायत महासमुंद के मुख्यालय में रिपोर्ट करने के निर्देश दिए गए हैं। उन्हें केवल जीवन निर्वाह भत्ता ही प्रदान किया जाएगा, और कोई अन्य वेतन या लाभ नहीं मिलेगा। प्रशासन ने इस कार्रवाई को एक उदाहरण के रूप में पेश किया है, ताकि अन्य पंचायत सचिवों को यह संदेश जाए कि शासन की योजनाओं में किसी भी तरह की ढिलाई पर कड़ी नजर रखी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम ग्रामीण प्रशासन में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
तत्काल राहत छपोराडीह के सचिव किशोर कुमार ध्रुव को सौंपी गई।
अतिरिक्त जिम्मेदारी!
प्रशासन ने पंचायत की व्यवस्था को पटरी से उतरने से बचाने के लिए फुर्ती दिखाते हुए ग्राम पंचायत छपोराडीह के सचिव किशोर कुमार ध्रुव को बांसकुड़ा का अतिरिक्त प्रभार सौंप दिया है। किशोर कुमार, जो अपनी कुशलता और समयबद्धता के लिए जाने जाते हैं, को निर्देश दिए गए हैं कि वे लंबित कार्यों को प्राथमिकता दें। इनमें शौचालय निर्माण, सड़क मरम्मत, जल जीवन मिशन के तहत पाइपलाइन विस्तार और महिला सशक्तिकरण योजनाओं का क्रियान्वयन शामिल है। प्रशासन की उम्मीद है कि उनके नेतृत्व में पंचायत के कामकाज में तेजी आएगी और ग्रामीणों की शिकायतें दूर होंगी।
गांव में उत्साह की लहर ग्रामीणों ने कहा- 'अब विकास की रफ्तार पकड़ेगी'..!
इस निलंबन आदेश के बाद बांसकुड़ा गांव में ग्रामीणों के बीच उत्साह का माहौल है। कई स्थानीय निवासियों ने बताया कि सचिव की अनुपस्थिति से महीनों से कार्य लंबित थे, जिससे दैनिक जीवन प्रभावित हो रहा था। एक ग्रामीण रामलाल ने कहा, "पहले फाइलें धूल खा रही थीं, अब नए सचिव से उम्मीद है कि मनरेगा के काम शुरू होंगे और आवास योजना के लाभ मिलेंगे।" वहीं, महिलाओं ने भी इस फैसले का स्वागत किया, क्योंकि स्वास्थ्य और शिक्षा से जुड़ी योजनाएं प्रभावित हो रही थीं। कुछ लोगों का मानना है कि यह कार्रवाई अन्य पंचायतों के लिए सबक बनेगी, जहां भी लापरवाही हो रही है।
प्रशासन की बड़ी रणनीति: अन्य पंचायतों पर भी कड़ी नजर, समीक्षा की तैयारी..!
मुख्य कार्यपालन अधिकारी हेमंत नंदनवार ने अपने बयान में दोहराया कि शासन की जनकल्याणकारी योजनाएं जमीनी स्तर पर पहुंचनी चाहिए, और पंचायतें इसका पहला माध्यम हैं। उन्होंने कहा, "कर्मचारियों की जवाबदेही सुनिश्चित करना हमारा प्राथमिक लक्ष्य है। लापरवाही करने वालों पर सख्ती बरती जाएगी।" सूत्रों से पता चला है कि जिला प्रशासन अब पूरे महासमुंद जिले की अन्य पंचायतों की समीक्षा करने की योजना बना रहा है। अनुपस्थिति, देरी से रिपोर्टिंग या योजनाओं में अनियमितता पाए जाने पर और कार्रवाई हो सकती है। यह कदम राज्य स्तर पर ग्रामीण विकास को मजबूत करने की दिशा में देखा जा रहा है।
नजीर बनकर उभरा यह मामला
पूरे जिले में सतर्कता का माहौल..!
बांसकुड़ा पंचायत का यह निलंबन अब जिले भर के पंचायत सचिवों और कर्मचारियों के लिए एक बड़ी चेतावनी बन गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे फैसले से प्रशासनिक दक्षता बढ़ेगी और भ्रष्टाचार या लापरवाही पर अंकुश लगेगा। ग्रामीण विकास विभाग के अधिकारियों का मानना है कि इससे योजनाओं का क्रियान्वयन तेज होगा, और अंततः लाभ आम जनता को मिलेगा। अब सभी की नजरें किशोर कुमार ध्रुव के कार्यकाल पर टिकी हैं, जो यह तय करेगा कि पंचायत कितनी जल्दी पटरी पर लौटती है।
यह घटना न केवल एक व्यक्तिगत कार्रवाई है, बल्कि शासन की प्रतिबद्धता का प्रतीक है कि जनहित से ऊपर कुछ नहीं। महासमुंद जिले में ऐसे और कदम उठाए जाने की संभावना से प्रशासनिक सुधार की नई लहर आने की उम्मीद की जा रही है।
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