
रिपोर्टर मयंक गुप्ता
महासमुंद / 05 अक्टूबर 2025 छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में एक दिल दहला देने वाली घटना ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया। जनपद पंचायत महासमुंद की उपाध्यक्ष हुलसी चंद्राकर के पति जितेंद्र चंद्राकर की शुक्रवार रात NH-353 पर हुए एक भीषण सड़क हादसे में मौत हो गई। यह हादसा साराडीह मोड़ के पास हुआ, जहां एक तेज रफ्तार सफारी गाड़ी ने उनकी स्कूटी को रौंद दिया। इस घटना ने न केवल एक परिवार को शोक में डुबो दिया, बल्कि स्थानीय राजनीति और सामाजिक माहौल में भी तनाव पैदा कर दिया।
हादसे की भयावहता
चश्मदीदों के अनुसार, रात के समय NH-353 पर तेज रफ्तार से आ रही सफारी गाड़ी ने जितेंद्र चंद्राकर की स्कूटी को इतनी जोर से टक्कर मारी कि उनकी मौके पर ही मौत हो गई। स्थानीय लोगों ने बताया कि टक्कर इतनी भयानक थी कि स्कूटी के परखच्चे उड़ गए, और जितेंद्र को बचाने का कोई मौका ही नहीं मिला। हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस और स्थानीय लोग मौके पर पहुंचे, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। जितेंद्र को जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
आरोपी का आत्मसमर्पण, लेकिन सवाल बरकरार
पुलिस के अनुसार, सफारी गाड़ी का मालिक और चालक अमन अग्रवाल है, जिसने घटना के बाद सिटी कोतवाली थाने में आत्मसमर्पण कर दिया। पुलिस ने गाड़ी को जब्त कर लिया है और मामले की जांच शुरू कर दी है। थाना प्रभारी ने बताया कि प्रारंभिक जांच में यह एक सड़क हादसा प्रतीत होता है, लेकिन मृतक के परिजनों और स्थानीय लोगों के आरोपों को देखते हुए सभी पहलुओं की गहराई से जांच की जा रही है।
पुरानी रंजिश: हादसा या साजिश..?
हादसे के बाद बेलसोडा गांव और आसपास के क्षेत्रों में चर्चा गरम है कि यह महज एक हादसा नहीं, बल्कि पुरानी दुश्मनी का नतीजा हो सकता है। सूत्रों के अनुसार, जितेंद्र चंद्राकर और अमन अग्रवाल के बीच जमीन को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा था। कुछ महीने पहले दोनों के बीच तीखी नोकझोंक और झगड़ा भी हुआ था। ग्रामीणों का दावा है कि इस हादसे के पीछे पुरानी रंजिश हो सकती है, और इसे साजिश के तौर पर देखा जा रहा है।
राजनीतिक उबाल और भाजपा की मांग
जितेंद्र चंद्राकर न केवल जनपद उपाध्यक्ष हुलसी चंद्राकर के पति थे, बल्कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सक्रिय कार्यकर्ता और स्थानीय नेता भी थे। उनकी मौत ने जिले के राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। भाजपा के स्थानीय नेताओं ने इस घटना को “संदिग्ध” करार देते हुए निष्पक्ष और गहन जांच की मांग की है। पार्टी नेताओं का कहना है कि जितेंद्र की मृत्यु केवल एक हादसा नहीं लगती, और इसके पीछे गहरी साजिश हो सकती है।
गांव में मातम, प्रशासन पर दबाव
जितेंद्र की मौत की खबर जैसे ही बेलसोडा गांव पहुंची, वहां मातम छा गया। हुलसी चंद्राकर की हालत गंभीर बताई जा रही है, और वे बार-बार बेहोश हो रही हैं। गांववालों ने गुस्से में सिटी कोतवाली थाने का घेराव किया और न्याय की मांग की। स्थिति तनावपूर्ण होने पर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक प्रतिभा पांडे मौके पर पहुंचीं और लोगों को समझाइश देकर शांत कराया।
हुलसी चंद्राकर के समर्थकों का अल्टीमेटम
हुलसी चंद्राकर के समर्थकों ने चेतावनी दी है कि यदि इस मामले में त्वरित और निष्पक्ष कार्रवाई नहीं हुई, तो वे चक्का जाम और धरना-प्रदर्शन करेंगे। इस घटना ने महासमुंद की स्थानीय राजनीति को गरमा दिया है, और प्रशासन पर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का दबाव बढ़ रहा है।
पुलिस का आश्वासन
महासमुंद पुलिस ने शांति बनाए रखने की अपील की है और आश्वासन दिया है कि दोषियों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा। जांच में हादसे के कारणों, पुरानी रंजिश के आरोपों और अन्य संभावित कोणों पर गौर किया जा रहा है। पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया कि जांच पूरी होने तक किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचा जा सकता।
जिले में शोक की लहर
यह घटना केवल एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि पूरे महासमुंद जिले के लिए एक गहरा आघात है। जितेंद्र चंद्राकर की सामाजिक और राजनीतिक सक्रियता ने उन्हें क्षेत्र में सम्मानित व्यक्ति बनाया था। उनकी असामयिक मृत्यु ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं, जिनके जवाब पुलिस जांच पर निर्भर हैं।
आगे क्या..?
क्या यह हादसा केवल एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना थी, या इसके पीछे कोई गहरी साजिश थी? क्या पुरानी रंजिश ने जितेंद्र चंद्राकर की जान ले ली, या यह महज एक सड़क दुर्घटना थी? इन सवालों के जवाब आने वाले दिनों में पुलिस जांच से स्पष्ट होंगे। फिलहाल, महासमुंद का माहौल गम और गुस्से से भरा हुआ है, और सभी की नजरें जांच के नतीजों पर टिकी हैं।
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