रिपोर्टर मयंक गुप्ता
महासमुंद (छत्तीसगढ़)।
जिले के बागबाहरा क्षेत्र के छोटे से गांव मोंगरापाली में स्थित एक शासकीय स्कूल इन दिनों गंभीर आरोपों के चलते सुर्खियों में है। यहां संचालित छत्तीसगढ़ राज्य ओपन स्कूल का परीक्षा केन्द्र क्रमांक 0614 कथित रूप से नकल और अवैध वसूली के बड़े नेटवर्क का केंद्र बन गया है। आरोप केवल नकल तक सीमित नहीं हैं, बल्कि पैसे लेकर परीक्षार्थियों को पास कराने के संगठित खेल की ओर इशारा करते हैं।
परीक्षा केन्द्र या ‘पास कराने की फैक्ट्री’..?
मोंगरापाली के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में संचालित इस केन्द्र को लेकर स्थानीय स्तर पर लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं। आरोप है कि यहां परीक्षा के दौरान खुलेआम नकल करवाई जाती थी।
बताया जा रहा है कि परीक्षार्थियों को पहले से सेटिंग के तहत बुलाया जाता था और परीक्षा के समय व्हाइट बोर्ड पर उत्तर लिखकर उन्हें कॉपी कराया जाता था।
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, यह पूरा सिस्टम सुनियोजित तरीके से चलता था, जहां पढ़ाई या योग्यता से ज्यादा महत्व पैसे को दिया जाता था।
‘पास कराने’ के नाम पर लाखों की वसूली..!
मामले का सबसे चौंकाने वाला पहलू आर्थिक लेन-देन से जुड़ा है। आरोप हैं कि केन्द्र से जुड़े कुछ जिम्मेदार लोग परीक्षार्थियों से मोटी रकम लेकर उन्हें पास कराने का भरोसा देते थे।
अनुमान लगाया जा रहा है कि इस कथित खेल के जरिए हर साल 20 से 25 लाख रुपये तक की वसूली की जाती थी।
दूर-दराज के जिलों से भी छात्रों को यहां परीक्षा दिलाने के लिए लाया जाता था, जिससे यह मामला और भी गंभीर बन जाता है।
शिकायत के बाद पलटी कहानी
इस पूरे प्रकरण ने तब तूल पकड़ा जब स्कूल के कुछ शिक्षकों द्वारा उच्च स्तर पर शिकायत की गई। मामला लोक शिक्षण संचालनालय, रायपुर तक पहुंचा, जिसके बाद विभाग में हलचल मच गई।
लेकिन जांच की प्रक्रिया शुरू होते ही घटनाक्रम ने अचानक मोड़ ले लिया। शिकायत करने वाले ही अपने बयान से पीछे हट गए और लिखित में शिकायत से इनकार कर दिया।
इस यू-टर्न ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं—
क्या शिकायतकर्ताओं पर दबाव डाला गया?
या फिर मामला किसी प्रभावशाली नेटवर्क से जुड़ा हुआ है..?
जांच में जुटा शिक्षा विभाग
मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला शिक्षा अधिकारी विजय लहरे ने टीम के साथ परीक्षा केन्द्र का निरीक्षण किया।
करीब दो घंटे तक चली जांच के दौरान उत्तर पुस्तिकाओं को सील कर सुरक्षित रूप से थाना में जमा कराया गया।
अधिकारियों के मुताबिक, जिले के अन्य ओपन परीक्षा केन्द्रों की भी जांच की जा रही है और इस मामले में उच्च स्तर से निर्देश मिलने की बात कही गई है।
उठते सवाल, जवाब का इंतजार
इस पूरे घटनाक्रम ने कई अहम सवाल खड़े कर दिए हैं—
यदि यह गड़बड़ी लंबे समय से चल रही थी, तो अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
क्या इसमें बड़े स्तर पर मिलीभगत शामिल है?
शिकायतकर्ताओं के पीछे हटने के पीछे असली वजह क्या है..?
शिक्षा व्यवस्था पर गहरा असर
ओपन स्कूल प्रणाली उन विद्यार्थियों के लिए उम्मीद का जरिया होती है, जो किसी कारणवश नियमित पढ़ाई नहीं कर पाते।
लेकिन यदि इसी व्यवस्था में पैसे के दम पर परिणाम तय होने लगें, तो यह न केवल शिक्षा की विश्वसनीयता को कमजोर करता है, बल्कि समाज के भविष्य को भी प्रभावित करता है।
आगे क्या..?
फिलहाल प्रशासनिक जांच जारी है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि क्या इस मामले में ठोस कार्रवाई होती है या यह मामला भी कागजों में सिमट कर रह जाएगा।
यह भी जांच का विषय है कि मामला केवल एक केन्द्र तक सीमित है या फिर किसी बड़े नेटवर्क का हिस्सा—जिसका खुलासा आने वाले दिनों में हो सकता है।


No comments:
Post a Comment