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Wednesday, May 22, 2024

विज्ञापन नही देने पर घरोहर सदेश के संपादक द्वारा छुरा के संकल्प हास्पिटल को किया जा रहा बदनाम |

 

बंगाली डॉक्टरों का बनाया जा रहा प्रेस कार्ड ली जा रही है 5000 रूपये की राशि..?

रिपोर्टर मयंक गुप्ता गरियाबंद / कहते है न जब खुद का घर शीशे का हो तो दूसरे के घर में पत्थर नहीं मारा करते है। ये कहावत भले ही पुराना हो परन्तु सत्यता का प्रतीक है। जब कोई तेजी से बढ़ता है तो लोगों की बुरी नजर लग जाती है और उसको वो बदनाम कैसे किया जाये यह सोचने लगता है। क्यों कि, आज लोग अपने दुख से ज्यादा दुखी नहीं होते परन्तु लोगों की खुशी से ज्यादा दुखी होते है।

आपको बता दे जिला गरियाबंद के आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र के विकासखण्ड छुरा में आदिवासियो एवं आम जनता के लिये मिल का पत्थर साबित हो रहे श्री सकल्प मिशन हास्पिटल छत्तीसगढ़ को सोशल मिडिया के माध्यम से अपने आप को धरोहर सदेश का संपादक मानने वाले श्रीमती दीपिका प्रदीप बरई द्वारा बदनाम किया जा रहा है। घरोहर संदेश पोर्टल के माध्यम से श्री संकल्प हॉस्पिटल को अवैधानिक रूप से संचालित हो रहा है। ऐसा लेख किया गया है।

जबकि श्री सकल्प हास्पिटल के संचालक हेमचंद देवागन मिडिया से मुखातिब होते हुये कहा कि, मेरा ये हास्पिटल गरीब जनता को कम दर पर अच्छी ईलाज के लिये बनाया गया है जबकि लोग दूर-दूर से यहा आकर अपना ईलाज करवाते है और ठीक होकर जाते है। रही बात धरोहर सदेश के संपादक द्वारा मेरे हास्पिटल को अवैध कहा गया है जबकि आपको बता दू। हास्पिटल का पंजीयन केवल एक बार होता है बाद में उनको सिर्फ और सिर्फ रिनिवल कराया जाता है। मैं इतने सालों से हास्पिटल को संचालित कर रहा हूँ मेरे पास नर्सिंग होम एक्ट संबंधित संपूर्ण दस्तावेज उपलब्ध है। हा रिनिवल कराने हेतु छः माह की अवधि होती है जबकि मेरे द्वारा रिनिवल हेतु आवेदन प्रस्तुत किया जा चुका है किन्तु सपूर्ण छत्तीसगढ़ में अभी आदर्श आचार संहिता व्याप्त होने की स्थिति में नहीं मिला है। जबकि मेरे हास्पिटल में सेवानिवृत्त पूर्व मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डा जीएल टण्डन भी अपनी सेवा दे रहे है। मैं उन महानुनवियों के सलाह से ही हास्पिटल को संचालित कर रहा हूँ। सुविज्ञ सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार जिला गरियाबंद निवासी धरोहर संदेश के संपादक श्रीमती दीपिका प्रदीप बरई खुद तो बंगाल से यहा आकर बसे हुये है। सर्वप्रथम इनका मुख्य कार्य अवैध रूप से क्लिनिक संचालन का रहा इनके अवैध क्लिनिक सचालन में किसी प्रकार से व्यवधानिया उत्पन्न न हो इस हेतु इनके द्वारा धरोहर सदेश नामक वेब पोर्टल की डोमिन होस्ट लेकर कार्य की शुरूआत की गई। साथ ही गरियाबंद जिले के जितने भी बंगाली डाक्टर है उनको धरोहर सदेश की प्रतिनिधि नियुक्त कर आईडी कार्ड प्रदान कर 5000 रूपये ली गई है और ली जा रही है ताकि किसी प्रकार से बंगाली डाक्टरों के यहां नर्सिंग होम एक्ट के तहत नोडल अधिकारी एवं एसडीएम की छापामारी से बचा जा सके।

आज गरियाबंद जिले के समस्त विभागों में इनकी थू-थू हो रही है ये ऐसे पत्रकार है खुद अधिकारी बनकर अधिकारियों से बदसलूकी करते है और अवैध वसूली का काम करते है ये जिनको विज्ञापन की माग करते है नहीं देने पर उनको सोशल मिडिया के माध्यम से बदनाम करने का कार्य कर रहे है।

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