TET अनिवार्यता खत्म करने और शिक्षकों के हितों के लिए सौंपा गया चार सूत्रीय मांग पत्र...!!
रिपोर्टर मयंक गुप्ता
महासमुंद / 15 अक्टूबर 2025: छत्तीसगढ़ के शिक्षक समुदाय ने अपनी आवाज को और बुलंद करते हुए शिक्षा व्यवस्था में सुधार और अपने हितों की रक्षा के लिए एकजुट होकर जोरदार प्रदर्शन किया। छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन के जिला महासमुंद इकाई ने जिलाध्यक्ष नारायण चौधरी के नेतृत्व में बुधवार को जिला कलेक्टर को चार सूत्रीय मांगों का एक महत्वपूर्ण ज्ञापन सौंपा। यह ज्ञापन माननीय मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री, शिक्षा सचिव और संचालक लोक शिक्षण के नाम संबोधित किया गया है। इस अवसर पर प्रदेश संयोजक सुधीर प्रधान, शोभा सिंह देव, पूर्णानंद मिश्रा, केशव राम साहू, सादराम अजय, लालजी साहू, ब्लॉक अध्यक्ष राजेश साहू, विनोद यादव, महेंद्र चौधरी, गजेंद्र नायक, ललित साहू सहित संगठन के कई अन्य पदाधिकारी और शिक्षक उपस्थित रहे।
शिक्षकों की मांगें: TET अनिवार्यता समाप्त हो, पुरानी पेंशन बहाल हो
एसोसिएशन ने अपनी मांगों में सबसे प्रमुख रूप से शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) की अनिवार्यता को समाप्त करने की मांग उठाई है। संगठन ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के 1 सितंबर 2025 के फैसले में 5 वर्ष से अधिक सेवा वाले शिक्षकों के लिए TET को अनिवार्य कर दिया गया है। हालांकि, छत्तीसगढ़ शासन द्वारा 17 अगस्त 2012 को जारी राजपत्र (शिक्षक पंचायत संवर्ग भर्ती और सेवा शर्त नियम 2012) के अनुसार, उस तारीख से पहले नियुक्त शिक्षकों के लिए TET अनिवार्य नहीं था। एसोसिएशन ने मांग की है कि 17 अगस्त 2012 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों के हितों की रक्षा के लिए छत्तीसगढ़ सरकार सुप्रीम कोर्ट में हस्तक्षेप याचिका या पुनर्विचार याचिका दायर करे।
इसके साथ ही, संगठन ने पुरानी पेंशन योजना को बहाल करने की मांग को प्रमुखता से उठाया है। एसोसिएशन ने सुझाव दिया कि सभी एल.बी. संवर्ग के शिक्षकों की पूर्व सेवा अवधि की गणना कर पुरानी पेंशन का प्रावधान लागू किया जाए। साथ ही, भारत सरकार की तर्ज पर 20 वर्ष की सेवा के बाद पूर्ण पेंशन का लाभ देने की मांग भी शामिल है।
क्रमोन्नति और समयमान का सामान्य आदेश जारी हो
एसोसिएशन ने उच्च न्यायालय के निर्णय के अनुरूप सभी पात्र एल.बी. संवर्ग के शिक्षकों के लिए क्रमोन्नति और समयमान के लिए सामान्य आदेश (जनरल ऑर्डर) जारी करने की मांग की है। संगठन का कहना है कि शिक्षकों की लंबे समय से लंबित मांगों को पूरा करने के लिए तत्काल कदम उठाए जाने चाहिए। यह कदम न केवल शिक्षकों के मनोबल को बढ़ाएगा, बल्कि शिक्षा व्यवस्था को भी मजबूती प्रदान करेगा।
शिक्षकों का एकजुट प्रदर्शन और संदेश
इस महत्वपूर्ण अवसर पर एसोसिएशन के कई सक्रिय सदस्य, जिनमें खिलावन वर्मा, पवन साहू, मनीष अवसरिया, देवेंद्र चंद्राकर, लक्ष्मण दास मानिकपुरी, मोहन लाल साहू, घनश्याम चक्रधारी, गजेंद्र फूटान, कमलेश साहू, चेतन लाल टांडेकर, हितेंद्र साहू, केवल साहू, गोविंद देवांगन, सविता साहू, खेमिन साहू, भारती सोनी, माहेश्वरी साहू, रविशंकर बंछोर, मनीषा सोनी, ईश्वर साहू, लीलेय साहू, लक्ष्मीनाथ सकारियां, किरण कन्नौजे, हेमंत यदु, उत्तम साहू और महेश ध्रुव शामिल थे, ने एकजुट होकर अपनी मांगों के त्वरित निराकरण के लिए सरकार से तत्काल कार्रवाई की अपील की।
जिला सचिव नंदकुमार साहू और जिला मीडिया प्रभारी प्रदीप वर्मा ने संयुक्त रूप से बताया कि छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन शिक्षकों के अधिकारों और कल्याण के लिए दृढ़ संकल्पित है। उन्होंने कहा, “हमारी मांगें न केवल शिक्षकों के हितों से जुड़ी हैं, बल्कि यह शिक्षा के स्तर को ऊंचा उठाने और शिक्षकों की गरिमा को बनाए रखने के लिए भी जरूरी हैं। हम सरकार से अपेक्षा करते हैं कि वह हमारी इन जायज मांगों पर गंभीरता से विचार करे और त्वरित समाधान प्रदान करे।”
भविष्य की रणनीति और चेतावनी
एसोसिएशन ने स्पष्ट किया कि यदि उनकी मांगों पर समयबद्ध कार्रवाई नहीं की गई, तो संगठन भविष्य में और बड़े स्तर पर आंदोलन करने के लिए तैयार है। शिक्षकों का कहना है कि उनकी मांगें केवल उनके व्यक्तिगत हितों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह छत्तीसगढ़ की शिक्षा व्यवस्था को और सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
शिक्षा समुदाय में नई जागृति
यह प्रदर्शन और ज्ञापन सौंपने की कार्रवाई छत्तीसगढ़ के शिक्षक समुदाय में एक नई जागृति का प्रतीक बन गई है। शिक्षकों की एकजुटता और उनके दृढ़ निश्चय ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वे अपने हकों के लिए चुप नहीं बैठेंगे। अब सभी की निगाहें सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं, जो यह तय करेगा कि शिक्षकों की इन मांगों का क्या हश्र होगा।
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