3 लाख का शांति फंड, 25K में फाइल गायब, जंगल ट्रांसफर का आतंक — महासमुंद चीखा: “बच्चों की किताबें बेची जा रही!”
रिपोर्टर मयंक गुप्ता सरायपाली (महासमुंद) चाय की टपरी पर एक शिक्षक ने चाय का घूँट रोका और फुसफुसाया, “सर, स्कूल में क्लास नहीं, सौदा चल रहा है।” अगले पल सन्नाटा। क्योंकि सब जानते हैं — DEO विजय कुमार लहरे का नाम लेते ही हवा में डर नहीं, डील की खुशबू फैलती है। यह खबर नहीं। यह शिक्षा के अंतिम संस्कार का निमंत्रण पत्र है।
पहला कांड: हर्बल लाइफ वाला शिक्षक, सजा सिर्फ “चाय कटौती”
1 अगस्त। स्कूल में क्लास की जगह हर्बल लाइफ का सेमिनार। जांच हुई। रिपोर्ट आई। दोष साबित। फिर हुआ क्या? DEO लहरे ने फोन घुमाया। सस्पेंशन रद्द। सजा? “अगले महीने चाय नहीं मिलेगी।” एक अफसर ने नाम न छापने की शर्त पर कहा: “यहाँ सजा नहीं, सौदा होता है। 10 हजार में फाइल साफ।”दूसरा खुलासा: DEO की डायरी में लिखा है पूरा ‘रेट कार्ड’
सूत्रों ने बताया — लहरे की डायरी कोई डायरी नहीं। यह कमीशन की खाता-बही है। पेज पर साफ लिखा: छोटी शिकायत दबानी हो? → 15 हजार फाइल गायब करनी हो? → 25 हजार साइड बिजनेस चलाना हो? → 20 हजार + ट्रांसफर फ्री एक शिक्षक बोला: “हम बच्चों को ईमानदारी पढ़ाते हैं। वो हमें सौदा सिखाते हैं।”तीसरा डर: शिकायत की तो जंगल में ट्रांसफर
अभिनय शाह ने शिकायत की। जवाब मिला: “शिकायत वापस लो, वरना जंगल का स्कूल पक्का।” अब अभिनय कोर्ट जा रहा है। उसकी आवाज अब चाय की टपरी पर रिंगटोन बन गई है। शिक्षक कहते हैं: “यहाँ बोलने की कीमत नौकरी है।”
चौथा सबूत: 5 महीने, 22 शिकायतें, एक भी सस्पेंशन नहीं
मई से सितंबर तक: 4 शिकायतें धमकी से दबीं 5 ट्रांसफर के डर से चुप हो गईं 6 प्राइवेट सौदे से सुलझीं 3 फाइलें गायब 4 कमीशन देकर माफ कुल जमा: लगभग 3 लाख रुपये का ‘शांति फंड’। सस्पेंशन? जीरो। पाँचवां विद्रोह: शिक्षक संघ ने दी चेतावनी छत्तीसगढ़ शिक्षक संघ ने कहा:“DEO लहरे को हटाओ, वरना महासमुंद में धरना, फिर पूरे जिले में हड़ताल।”
BEO मांझी ने रिपोर्ट दी थी। ऊपर से फाड़ दी गई। अब वो चुप हैं। डर गए हैं।आखिरी गुहार: CM साय तक पहुँचा मामला
जनता ने रायपुर तक आवाज पहुँचाई: “मुख्यमंत्री जी, शिक्षा बचा लो। यहाँ बच्चे नहीं, सौदे हो रहे हैं।” स्कूलों के बाहर अब मजाक में बोर्ड लग रहे हैं: “हर्बल लाइफ कोर्स — फ्री, कमीशन — जरूरी।”जनता का फैसला
लहरे का तख्त डगमगा रहा है। अगर जांच नहीं हुई, तो जनता सड़क पर उतरेगी।शिक्षा बचेगी या सौदे चलते रहेंगे..?
यह सवाल अब सिर्फ महासमुंद का नहीं, पूरे छत्तीसगढ़ का है
यह खबर नहीं। यह शिक्षा की चीख है। जो सुन ले, वही बचेगा। जो अनसुना करे, वही डूबेगा।
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