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Friday, December 5, 2025

“कोविड की लाशों पर 39 लाख का केक काटा महासमुंद के अफसरों ने – 5 साल बाद भी कोई कार्यवाही नहीं..?”

5 साल बाद भी दोषी खुले घूम रहे, गुनाह कबूला फिर भी सजा ज़ीरो – पत्रकार ने CM साय को लिखा पत्र

रायपुर / आप लोगों ने कई प्रकार की बीमारियों वाली महामारी के बारे में सुना और देखा होगा जैसे कि,मलेरिया,हैजा,चिकन पॉक्स,फाइलेरिया किंतु एक महामारी ने पूरे प्रदेश नहीं सम्पूर्ण जगत में अपनी एक अलग पहचान बना लिया जिसे कोविड 19 वैश्विक महामारी कोरोना के नाम से एक अलग पहचान मिली जो कि,संपूर्ण जगत को झकझोर कर रख दिया गया। बता दे कि , इस महामारी ने अपना नाम एक इतिहास रच कीर्तिमान स्थापित कर दिया और तो और अब स्कूलों में होने वाले एग्जाम में भी पूछा जाएगा कि, कोरोना महामारी के जन्मदाता कौन है कब इसकी शुरुआत हुई कितने लोगों ने अपनो को खोया शासन प्रशासन कैसे कैसे हथकंडे अपनाए ये सब सवाल आने वाले है । इसी तारतम्य में छत्तीसगढ़ के जिला महासमुंद जब पूरा देश कोविड-19 की भयानक लहर से त्राहिमाम कर रहा था… जब लोग अस्पताल के बाहर ऑक्सीजन के लिए गिड़गिड़ा रहे थे… जब श्मशान घाटों में लकड़ियाँ तक खत्म हो गई थीं… जब माँ-बाप, बच्चे, नौजवान एक-एक साँस के लिए जद्दोजहद कर रहे थे… ठीक उसी वक्त छत्तीसगढ़ के महासमुंद में कुछ “जनसेवक” सरकारी खजाने को लूटने में लगे थे!

जनपद पंचायत महासमुंद में 15वें वित्त आयोग की 39 लाख रुपये की राशि का खुलेआम गबन

बता दे कि, हर योजनाओं का एक मद होता है वैसे ही कोरोना काल के समय विवेकानंद मद से ओपन जिम, मास्क-सैनिटाइजर की खरीदी में दो-ढाई गुना रेट पर लूट नियमों को रौंदकर सीधे वेंडर के खाते में पैसे ट्रांसफर फर्जी बिल, फर्जी कोटेशन, फर्जी सप्लाई… सब कुछ! जब जनता मर रही थी, ये लोग “कोविड फंड” से अपनी जेबें भर रहे थे पत्रकार अश्वनी सोनी “जनता की ताकत” ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को 3 दिसंबर 2025 को जो चिट्ठी लिखी है, उसे पढ़कर रोंगटे खड़े हो जाते हैं। पत्र में लिखा है। “कोविड किसी के लिए आपदा था, तो किसी के लिए अवसर जो आपदा में रहे उन्होंने अपनों को खो दिया जिसे अपना समझे वो आपदा को अवसर बनाकर लूट लिये किसी ने कोई कसर नहीं छोड़े। जिन्हें अवसर मिला, उन्होंने लोगों की जान से खिलवाड़ करते हुए लाखों-करोड़ों की राशियों को आपसी बंदरबांट कर हजम कर लिये… और डकार तक नहीं लिए ।”

दोषी अधिकारियों ने गुनाह कबूल किया, माफी मांगी, फिर भी बच निकले..!

39 लाख घोटाला मामले में संलिप्त ..!

दिलीप मनहरे – सहायक लेखा परीक्षा एवं करारोपण अधिकारी समृद्धि शर्मा – संकाय सदस्य (BPRC) इन दोनों ने जांच में अपना अपराध कबूल कर लिया था। माफी मांग ली थी। फिर भी निलंबन नहीं, बर्खास्तगी नहीं, वसूली नहीं… बल्कि संरक्षण और प्रमोशन!

सबसे बड़ा सवाल तत्कालीन CEO एस. आलोक जिला पंचायत ने दोषियों को क्यों बचाया..?

पत्रकार अश्वनी सोनी ने खुला आरोप लगाया है: “तत्कालीन CEO एस. आलोक ने जांच टीम को मौखिक निर्देश देकर दोषियों को क्लीन चिट दिलवाई। साक्ष्यों को दबाया गया, जांच को शिथिल किया गया। यह साफ-साफ भ्रष्टाचार की मिलीभगत है। इसलिए 39 लाख की पूरी वसूली सबसे पहले एस. आलोक से ही हो!”

कोविड काल में हुआ था खेल, 5 साल बाद भी फाइलें दबी हैं

जांच हुई – अनियमितता साबित हुई दस्तावेजों में गड़बड़ी पकड़ी गई छत्तीसगढ़ भंडार क्रय नियम-2002 की धज्जियाँ उड़ाई गईं बिना टेंडर, बिना कोटेशन, दोगुने दाम पर खरीदी फिर भी कार्रवाई = शून्य

पत्रकार ने CM से 5 बड़ी मांगें कीं

दोनों आरोपी अधिकारियों का तत्काल निलंबन 39 लाख + ब्याज की पूरी वसूली (सबसे पहले CEO एस. आलोक से) शिकायतकर्ता की मौजूदगी में नई स्वतंत्र जांच सभी दस्तावेजों का फोरेंसिक ऑडिट जनदर्शन की लंबित शिकायत का तुरंत निराकरण

आखिरी लाइन जो दिल झकझोर देती है… पत्रकार ने लिखा है..?

“मैंने बार-बार शिकायत की, न्यूज़ चलाई, सोशल मीडिया पर बेनकाब किया। लेकिन ऊपर बैठे लोगों के कान पर जूं तक नहीं रेंगी। अगर एक पत्रकार को ही न्याय नहीं मिलेगा, तो उस आम आदमी का क्या होगा जो अस्पताल में आखिरी साँस लेते हुए भी इन लुटेरों के पाप का शिकार बना था?” मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने “भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस” का नारा दिया था। अब मौका है उसे साबित करने का।

क्या कोविड काल के इन “लुटेरों” पर गाज गिरेगी..? या 39 लाख का यह घोटाला भी फाइलों में दफ्न हो जाएगा..?

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