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Monday, January 12, 2026

सब्जी से उंगलियों के राज खोलने वाला पाउडर! मृणाल विदानी की अनोखी खोज ने छत्तीसगढ़ को गौरवान्वित किया, मिला प्रतिष्ठित 'युवा रत्न'

महासमुंद से मास्टर्स तक का सफर: मृणाल विदानी ने स्थानीय संसाधनों से फोरेंसिक में क्रांति लाई, CM ने दिया 1 लाख का 'युवा रत्न' सम्मान

रिपोर्टर मयंक गुप्ता रायपुर / 13 जनवरी 2026 छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले की प्रतिभाशाली बेटी मृणाल विदानी ने नवाचार के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाते हुए राज्य स्तरीय युवा रत्न सम्मान से सम्मानित होने का गौरव प्राप्त किया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने राष्ट्रीय युवा दिवस के अवसर पर आयोजित भव्य समारोह में उन्हें यह प्रतिष्ठित सम्मान प्रदान किया।

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यह सम्मान खेल एवं युवा कल्याण विभाग, छत्तीसगढ़ शासन द्वारा कन्वेंशन हॉल, सर्किट हाउस, रायपुर में आयोजित किया गया। इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री एवं खेल मंत्री अरुण साव तथा राज्य युवा आयोग के अध्यक्ष विश्वविजय सिंह तोमर भी उपस्थित रहे। मृणाल को उनके उत्कृष्ट नवाचारों के लिए 1 लाख रुपये की नकद राशि और प्रमाण-पत्र प्रदान किया गया। मृणाल विदानी के अनूठे नवाचार मृणाल विदानी ने छत्तीसगढ़ की स्थानीय प्राकृतिक सामग्रियों का उपयोग करके फोरेंसिक साइंस में क्रांतिकारी योगदान दिया है।

उनके प्रमुख नवाचार निम्नलिखित हैं

कोसे (एक स्थानीय पौधा) के धागों से पर्यावरण-अनुकूल फोरेंसिक ब्रश तैयार करना।

छत्तीसगढ़ में प्रचलित चेंच भाजी (एक प्रकार की स्थानीय सब्जी) से सुरक्षित और सस्ता फोरेंसिक पाउडर विकसित करना, जो अपराध स्थलों पर गुप्त फिंगरप्रिंट उजागर करने में प्रभावी है।

गोबर खरसी (एक स्थानीय पौधा) की राख से भी उच्च गुणवत्ता वाला फोरेंसिक पाउडर बनाना।

इन नवाचारों के लिए मृणाल को भारत सरकार से कॉपीराइट प्राप्त हो चुका है। ये उत्पाद न केवल पर्यावरण के अनुकूल हैं, बल्कि पारंपरिक केमिकल-आधारित फोरेंसिक सामग्रियों की तुलना में बहुत कम लागत वाले भी हैं।

अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय स्तर पर मिली मान्यता

मृणाल विदानी की प्रतिभा सिर्फ राज्य तक सीमित नहीं है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी छाप छोड़ी है।

विवेकानंद ग्लोबल यूनिवर्सिटी, जयपुर में आयोजित इंटरनेशनल फोरेंसिक वैज्ञानिक कॉन्फ्रेंस में

वर्ष 2023 में कोसे के धागे से बने फोरेंसिक ब्रश के लिए बेस्ट इंटरनेशनल साइंटिस्ट अवॉर्ड।

2025 में चेंच भाजी से बने फोरेंसिक पाउडर के लिए बेस्ट इंटरनेशनल इनोवेशन।

खरसी की राख आधारित प्रक्रिया के लिए बेस्ट प्रेजेंटेशन और बेस्ट इनोवेशन का सम्मान।

नेशनल लेवल रिसर्च कांक्लेव 2025 में बेस्ट प्रोडक्ट डिस्प्ले अवॉर्ड।

मृणाल नियमित रूप से इंटरनेशनल फोरेंसिक साइंटिस्ट मीट कार्यक्रमों का सफल संचालन भी करती हैं।

शिक्षा और प्रारंभिक जीवन

मृणाल विदानी वर्तमान में विवेकानंद ग्लोबल यूनिवर्सिटी, जयपुर में फोरेंसिक साइंस में मास्टर्स (डीएनए विषय सहित) की अंतिम सेमेस्टर की पढ़ाई कर रही हैं। उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा वेडनर मेमोरियल सीनियर सेकेंडरी स्कूल महासमुंद से कक्षा पहली से बारहवीं तक पूरी की, जहां वे शुरू से ही मेधावी छात्रा रहीं। उनके पिता रविंद्र विदानी और माता उत्तरा विदानी सुभाष नगर महासमुंद के निवासी हैं। साथ ही मृणाल के माता और पिता भी पत्रकारिता की जगत में अपनी अनूठी छाप भी छोड़े है।

युवा रत्न सम्मान योजना का उद्देश्य

यह योजना 15 से 29 वर्ष आयु वर्ग के युवाओं एवं स्वैच्छिक संगठनों को सामाजिक, सांस्कृतिक, साहित्यिक, शैक्षणिक, खेल एवं अन्य क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य के लिए प्रेरित करती है। इसका मुख्य लक्ष्य युवाओं में समुदाय के प्रति जिम्मेदारी की भावना जगाना, व्यक्तिगत क्षमता विकास करना और राष्ट्रीय विकास व समाज सेवा में योगदान के लिए प्रोत्साहित करना है।

मृणाल विदानी की यह उपलब्धि

न केवल महासमुंद और छत्तीसगढ़ के लिए गर्व का विषय है, बल्कि पूरे देश के युवाओं के लिए प्रेरणा स्रोत है। उन्होंने साबित किया है कि स्थानीय संसाधनों से भी वैश्विक स्तर के नवाचार संभव हैं।

छत्तीसगढ़ की यह बेटी निश्चित रूप से भविष्य में संपूर्ण देश जगत में अपनी छाप छोड़ेगी।

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