छत्तीसगढ़ में धान खरीदी का संकट: किसान कांग्रेस का उग्र आंदोलन, SDM दफ्तर घेरा, राज्यपाल को 7 मांगों का अल्टीमेटम - Bebaak Bayan

Breaking

Home Top Ad

Responsive Ads Here

Post Top Ad

Responsive Ads Here

Wednesday, January 28, 2026

छत्तीसगढ़ में धान खरीदी का संकट: किसान कांग्रेस का उग्र आंदोलन, SDM दफ्तर घेरा, राज्यपाल को 7 मांगों का अल्टीमेटम

 

रिपोर्टर मयंक गुप्ता सरायपाली (महासमुंद)। छत्तीसगढ़ की कृषि अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले धान उत्पादन में इस साल भारी अव्यवस्था का सामना कर रहे किसानों ने अपनी आवाज बुलंद कर दी है। सोमवार को किसान कांग्रेस के बैनर तले सैकड़ों किसानों ने महासमुंद जिले के सरायपाली इलाके में जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। स्थानीय विधायक चतुरीनंद और जिला किसान कांग्रेस अध्यक्ष मानिक साहू की अगुवाई में किसानों का जत्था अनुविभागीय अधिकारी (एसडीएम) कार्यालय पहुंचा, जहां उन्होंने घेराव कर अपनी नाराजगी जाहिर की। प्रदर्शनकारियों ने राज्यपाल के नाम एक ज्ञापन सौंपा, जिसमें धान खरीदी प्रक्रिया में सुधार के लिए सात प्रमुख मांगें रखी गईं। यह आंदोलन प्रदेश भर में फैली धान खरीदी की बदहाली को उजागर करता है, जहां किसानों को अपनी मेहनत की फसल बेचने में भी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। प्रदर्शन की पृष्ठभूमि में छत्तीसगढ़ सरकार की धान खरीदी नीति पर गंभीर सवाल उठाए गए। किसान नेताओं ने आरोप लगाया कि खरीदी केंद्रों पर व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई है। हजारों किसान अभी भी अपनी उपज को सरकारी केंद्रों पर बेचने से महरूम हैं, जबकि पहले से जमा धान का उठाव न होने से बारिश या अन्य प्राकृतिक आपदाओं से नुकसान का खतरा मंडरा रहा है। सरकार द्वारा घोषित "एकमुश्त भुगतान" की नीति को भी किसानों ने महज एक जुमला करार दिया, क्योंकि वास्तव में भुगतान में देरी और कटौती की शिकायतें आम हैं। इस प्रदर्शन ने न केवल स्थानीय मुद्दों को उठाया, बल्कि पूरे प्रदेश में किसानों की व्यथा को प्रतिबिंबित किया, जहां कृषि संकट गहराता जा रहा है। किसान कांग्रेस के पदाधिकारियों ने प्रदर्शन के दौरान जोर देकर कहा कि धान खरीदी की प्रक्रिया में प्रशासन की उदासीनता और भ्रष्टाचार किसानों को तबाह कर रहा है। उन्होंने बताया कि कई किसान लंबे समय से टोकन का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन सरकारी तंत्र की लापरवाही से उनकी मेहनत बर्बाद हो रही है। प्रदर्शन में शामिल किसानों ने नारे लगाते हुए अपनी मांगों को दोहराया, जिससे इलाके में तनाव का माहौल बन गया। एसडीएम कार्यालय के बाहर घंटों चले इस घेराव ने स्थानीय प्रशासन को भी हिलाकर रख दिया।

किसानों की सात सूत्रीय मांगें विस्तार से समझें

किसानों ने ज्ञापन में अपनी मांगों को स्पष्ट रूप से रखा है, जो धान खरीदी की पूरी प्रक्रिया में सुधार की दिशा में एक रोडमैप की तरह हैं। ये मांगें न केवल तात्कालिक राहत प्रदान करेंगी, बल्कि भविष्य में ऐसी समस्याओं को रोकने में भी मददगार साबित हो सकती हैं: खरीदी की समयसीमा में विस्तार: वर्तमान अंतिम तिथि को बढ़ाकर 28 फरवरी 2026 तक किया जाए, ताकि सभी किसान अपनी फसल बेच सकें। इससे उन किसानों को फायदा होगा जो मौसम या अन्य कारणों से देरी से कटाई कर रहे हैं। जमा धान का तेज उठाव: खरीदी केंद्रों पर पड़े धान को तुरंत उठाया जाए, जिससे भंडारण की समस्या हल हो और नुकसान से बचा जा सके। किसानों का कहना है कि उठाव की देरी से धान सड़ने या चोरी होने का खतरा बढ़ जाता है। तत्काल एकमुश्त भुगतान: घोषित 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से पूरा भुगतान एक बार में किया जाए, बिना किसी कटौती या देरी के। यह मांग सरकार के वादों पर सवाल उठाती है, जहां किसानों को किस्तों में पैसा मिलता है। लंबित टोकन का शीघ्र जारी होना: सभी कटे या लंबित टोकन सात दिनों के अंदर जारी किए जाएं, ताकि किसान बिना विलंब के अपनी उपज बेच सकें। यह उन किसानों के लिए महत्वपूर्ण है जो प्रशासनिक गड़बड़ियों का शिकार हो रहे हैं। वन पट्टा धारक किसानों की समस्याओं का समाधान: तकनीकी दिक्कतों को तुरंत दूर किया जाए, जैसे दस्तावेजों की वैधता या रजिस्ट्रेशन में अड़चनें। ये किसान जंगल क्षेत्रों में रहते हैं और सरकारी योजनाओं से अक्सर वंचित रह जाते हैं। रकबा कटौती और उत्पीड़न पर रोक: गिरदावरी के नाम पर किसानों के खेतों के रकबे में कटौती बंद हो, साथ ही मानसिक उत्पीड़न की शिकायतों पर सख्त कार्रवाई की जाए। किसान नेताओं ने इसे प्रशासनिक दमन का रूप बताया। टोकन सत्यापन की जांच प्रक्रिया बंद: किसानों के घरों या कोठारों में जाकर धान की जांच करने की प्रथा तत्काल रोकी जाए, क्योंकि यह उनके सम्मान और गोपनीयता का उल्लंघन है। इससे किसानों में डर का माहौल बन रहा है। इन मांगों के पीछे किसानों की मुख्य शिकायत यह है कि टोकन सत्यापन के बहाने अधिकारियों द्वारा उनके घरों में दखलअंदाजी की जा रही है, जो न केवल अपमानजनक है बल्कि अनावश्यक भी। नेताओं ने इसे किसानों के स्वाभिमान पर हमला बताया और कहा कि ऐसी प्रथाएं लोकतंत्र में अस्वीकार्य हैं।

नेताओं की चेतावनी आंदोलन होगा और तेज

प्रदर्शन में प्रदेश स्तर के कई किसान कांग्रेस पदाधिकारी शामिल हुए, जिनमें राजेश मुखर्जी (प्रदेश कोषाध्यक्ष), अशोक शर्मा, कमल अग्रवाल, देवेंद्र पटेल, नवदीप चंद्राकर, फारम लाल पटेल (भंवरपुर ब्लॉक अध्यक्ष), भगत राम पटेल (छुहीपाली ब्लॉक अध्यक्ष), कौशल कुमार बघेल, दीपक साहू, विजय यादव और प्रभात पटेल प्रमुख थे। इन नेताओं ने एक स्वर में चेतावनी दी कि यदि इन मांगों पर तुरंत अमल नहीं किया गया, तो आंदोलन को और उग्र रूप दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि किसान अब चुप नहीं बैठेंगे और पूरे प्रदेश में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन आयोजित किए जाएंगे। प्रशासन की ओर से ज्ञापन को स्वीकार कर उच्च अधिकारियों को भेजने का आश्वासन दिया गया, लेकिन किसानों का कहना है कि वे अब महज वादों से संतुष्ट नहीं होंगे। उन्हें ठोस कार्रवाई चाहिए, अन्यथा संकट और गहरा सकता है। यह घटना छत्तीसगढ़ की कृषि राजनीति में एक नया मोड़ ला सकती है, जहां किसानों की मांगें अब चुनावी मुद्दा बन सकती हैं।

No comments:

Post a Comment

Post Bottom Ad

Responsive Ads Here

Pages