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Sunday, September 28, 2025

लखनपुर हादसा: नवरात्रि की भक्ति में बुजुर्ग की बेरहमी से मौत, ग्रामीणों की साजिश और BJP नेता पर आरोप

लखनपुर में मीडिया की टीम पहुंचते ही BJP नेता और ग्रामीण के कान हुए ठंडे

रिपोर्टर मयंक गुप्ता महासमुंद / छत्तीसगढ़ नवरात्रि के उत्साह के बीच महासमुंद जिले के पटेवा थाना क्षेत्र के लखनपुर गांव में एक बुजुर्ग की क्रूर ठोकर से हुई मौत ने पूरे इलाके को सदमे में डाल दिया है। घटना को 'साधारण दुर्घटना' बताकर छिपाने की कोशिश में ग्रामीणों ने लाखों रुपये की डील की साजिश रची, जिसमें स्थानीय BJP नेता की कथित संलिप्तता ने मामले को राजनीतिक विवाद का रूप दे दिया। अब मृतक के परिजन और ग्रामीणों का एक वर्ग पुलिस से सख्त कार्रवाई की मांग कर रहा है, वरना आंदोलन की चेतावनी दी गई है।

घटना का दर्दनाक विवरण: ठोकर से अस्पताल तक की सच्चाई

शारदीय नवरात्रि के दूसरे दिन, जब गांव मां दुर्गा की आराधना में लीन था, तब लखनपुर की प्राथमिक शाला के पास दुर्गा पंडाल के सामने हाईवे की ओर बनी सड़क पर एक बिजली पोल के निकट भयावह घटना घटी। ग्रामवासी विक्रम जोशी (पिता: राजकुमार जोशी) ने कथित तौर पर बुजुर्ग को जानबूझकर जोरदार ठोकर मारी, जिससे वे बुरी तरह चोटिल हो गए। चश्मदीदों के अनुसार, बुजुर्ग विक्षिप्त स्थिति में सड़क पर लोटने लगे, लेकिन ग्रामीणों की फौरन मदद से उन्हें झलप के सियाराम मल्टी स्पेशलिस्ट अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टरों ने जान बचाने की पूरी कोशिश की, लेकिन चोटों की गंभीरता के चलते बुजुर्ग ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। अस्पताल प्रशासन ने तत्काल पटेवा थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई, जिसमें पूरी घटना का ब्योरा दिया गया। शव को तुमगांव के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा गया, जहां जांच के बाद परिजनों को सौंप दिया गया। लेकिन यहीं से शुरू हुई न्याय प्रक्रिया की सबसे बड़ी कमजोरी। पटेवा पुलिस ने न तो मर्ग दर्ज किया और न ही पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट पर कोई ठोस कदम उठाया। सूत्रों का दावा है कि यह जान-बूझकर की गई लापरवाही थी, ताकि आरोपी पर कोई कानूनी कार्रवाई न हो सके।

ग्रामीणों की कथित साजिश: पैसे का लालच और दुर्गा पूजा का वादा

मौत के तुरंत बाद गांव में एक 'सामुदायिक बैठक' बुलाई गई, जो वास्तव में आरोपी को बचाने का षड्यंत्र साबित हुई। इस बैठक में मृतक के परिवार को लाखों रुपये का प्रलोभन दिया गया, ताकि वे मामले को सुलझाने पर सहमत हो जाएं। आरोपी के पिता राजकुमार जोशी ने न केवल परिवार को आर्थिक मदद का लालच दिखाया, बल्कि पूरे गांव को प्रभावित करने के लिए भारी रकम बांटी। उन्होंने भावुक अपील की कि अगले नवरात्रि में दुर्गा प्रतिमा स्थापना का पूरा खर्च वे उठाएंगे, लेकिन बदले में विक्रम पर कोई मुकदमा न चले। यह 'समझौता' न सिर्फ नैतिक रूप से गलत था, बल्कि कानूनी अपराध भी। ग्रामीणों ने साक्ष्यों को दबाने की कोशिश की, जिसमें घटनास्थल के पास किराने की दुकान पर लगे सीसीटीवी कैमरे की रिकॉर्डिंग को अनदेखा करने की योजना शामिल थी। विशेषज्ञों का कहना है कि इस फुटेज से घटना की सच्चाई साफ हो जाएगी, क्योंकि ठोकर का दृश्य स्पष्ट रूप से कैद है। फिर भी, इस 'आपसी सुलह' के नाम पर पुलिस ने कथित तौर पर फर्जी FIR दर्ज करने की कोशिश की, जो अब सामने आ रही है।

गांव में दो फाड़: न्याय की मांग बनाम बचाव की डील

लखनपुर में ग्रामीण दो गुटों में बंट गए हैं। एक गुट आरोपी को बचाने के लिए लाखों की डीलिंग में जुटा है, जबकि दूसरा गुट मृतक परिवार के साथ खड़ा होकर सख्त सजा की बात कर रहा है। दोषियों को जेल भेजने और FIR दर्ज करने की मांग तेज हो गई है।

BJP नेता पर सवाल: मामले दबाने में कथित भूमिका

इस पूरे घटनाक्रम में सबसे विवादास्पद नाम कमल कौशिक का है, जो BJP के झलप मंडल महामंत्री और लखनपुर के उप सरपंच हैं। विश्वसनीय जानकारी के मुताबिक, कौशिक ने बैठक में सक्रिय भागीदारी निभाई और मामले को दबाने में मदद की। क्या यह महज संयोग है कि एक राजनीतिक नेता आरोपी पक्ष का साथ दे रहा है? कुछ ग्रामीणों का आरोप है कि उनकी पहुंच के कारण ही पुलिस निष्क्रिय हो गई। यह न सिर्फ स्थानीय प्रशासन की निष्पक्षता पर सवाल उठाता है, बल्कि BJP की छवि को भी नुकसान पहुंचा सकता है।

न्याय की अपील: तुरंत FIR और जांच की जरूरत

मृतक के परिजनों और सामाजिक संगठनों ने पटेवा थाने पर फर्जी FIR के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की मांग की है। आरोपी विक्रम जोशी, उसके पिता राजकुमार जोशी और साजिश में शामिल सभी लोगों—खासकर कमल कौशिक की भूमिका—पर गहन जांच हो। सीसीटीवी फुटेज की फोरेंसिक जांच और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के आधार पर हत्या या गैर-इरादतन हत्या का केस दर्ज किया जाए। अगर उच्च अधिकारी शीघ्र कदम नहीं उठाते, तो यह आंदोलन का रूप ले सकता है और जिले भर में फैल सकता है। यह घटना सिर्फ एक परिवार के दुख की कहानी नहीं, बल्कि समाज में फैले भ्रष्टाचार और ताकतवरों की मनमानी का प्रतीक है। महासमुंद प्रशासन और पुलिस से उम्मीद है कि वे पारदर्शिता सुनिश्चित करेंगे और न्याय दिलाएंगे। अन्यथा, आम लोगों का न्याय व्यवस्था पर भरोसा हमेशा के लिए डगमगा सकता है। क्या आला अधिकारी इस पुकार को सुनेंगे..?

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