
रिपोर्टर मयंक गुप्ता महासमुंद / छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले के बिडोरा गांव में जंगल से भटके भालुओं का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा। मंगलवार सुबह हुए ताजा हमले में दो ग्रामीण गंभीर रूप से घायल हो गए, और वन विभाग की लचर कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि विभागीय कर्मचारी अपनी जिम्मेदारी से मुंह मोड़ रहे हैं, जिसके चलते घूमंतू जंगली जानवरों के हमले बढ़ते जा रहे हैं। सुबह करीब 7 बजे, 60 वर्षीय दान बाई ठाकुर तालाब किनारे कचरा फेंकने गई थीं, तभी एक भालू ने उन पर हमला कर दिया। उनके सिर और कमर में गहरी चोटें आईं। उसी दौरान, 55 वर्षीय छबिलाल साहू अपनी बाइक से खेत जा रहे थे, जब भालू ने उन पर झपट्टा मारा, जिससे उनके कूल्हे में गंभीर चोट लगी। दोनों को ग्रामीणों ने किसी तरह बागबाहरा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया, जहां उनकी हालत नाजुक बनी हुई है। गांव वालों का कहना है कि पिछले कुछ दिनों से पांच भालुओं का झुंड, जिसमें छोटे भालू भी शामिल हैं, गांव के आसपास मंडरा रहा है। एक दिन पहले इन भालुओं ने बच्चों को दौड़ाया था, जिससे पूरे गांव में दहशत है। ग्रामीणों ने बताया कि वन विभाग को बार-बार सूचना देने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। विभाग ने सिर्फ खानापूर्ति के लिए घायलों को 500-500 रुपये की मामूली मदद दी, जिसे ग्रामीणों ने "मजाक" करार दिया। ग्रामीणों का गुस्सा वन विभाग की लापरवाही पर फूट रहा है। उनका कहना है कि अगर समय रहते भालुओं को जंगल में वापस भेजा गया होता, तो यह हादसा टाला जा सकता था। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि भालुओं को तत्काल पकड़कर जंगल में छोड़ा जाए और वन विभाग के कर्मचारियों की जवाबदेही तय की जाए। यह घटना मानव-वन्यजीव संघर्ष की गंभीर समस्या को उजागर करती है, और वन विभाग की निष्क्रियता ने ग्रामीणों के बीच आक्रोश को और बढ़ा दिया है। प्रशासन की चुप्पी और लापरवाही से अब सवाल उठ रहा है कि आखिर कब तक ग्रामीण जंगली जानवरों के खौफ में जीने को मजबूर रहेंगे..?
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