रिपोर्टर मयंक गुप्ता महासमुंद 31 दिसंबर 2025 बुजुर्गों के लिए बनाई गई मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना को एक सरकारी शिक्षिका ने परिवार के साथ मिलकर "लूट" लिया..! शासकीय उच्चतर माध्यमिक स्कूल बेमचा में पदस्थ व्याख्याता श्रीमती किरण पटेल पर गंभीर आरोप लगे हैं कि उन्होंने फर्जी बीपीएल सूची में नाम जुड़वाकर और झूठा शपथ पत्र देकर खुद को "गैर-सरकारी कर्मचारी" बताते हुए योजना का फायदा उठाया। इतना ही नहीं, अपने पति पवन पटेल, मौसी गौरी बाई पटेल और अन्य रिश्तेदारों को भी अपात्र होते हुए तीर्थ यात्रा पर ले गईं। अब पूर्व पार्षद पंकज साहू ने मोर्चा खोल दिया है – शिक्षिका को फौरन बर्खास्त करने और धोखाधड़ी के लिए एफआईआर दर्ज करने की जोरदार मांग की जा रही है। यह मामला उस समय सामने आया जब 27 से 31 अक्टूबर 2025 तक महासमुंद जिले से प्रयागराज, काशी विश्वनाथ और हनुमान मंदिर की विशेष तीर्थ यात्रा आयोजित की गई। छत्तीसगढ़ सरकार की इस लोकप्रिय योजना का मकसद 65 वर्ष से अधिक उम्र के गरीब बुजुर्गों को मुफ्त धार्मिक यात्रा कराना है। समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित इस योजना में सख्त नियम हैं – सरकारी कर्मचारी पूरी तरह अपात्र हैं, और आवेदन में शपथ पत्र देकर यह घोषणा करनी पड़ती है कि आवेदक शासकीय सेवा में नहीं है। लेकिन आरोपों के मुताबिक, श्रीमती किरण पटेल ने इन नियमों को ताक पर रख दिया। उन्होंने आवेदन फॉर्म में स्पष्ट झूठ बोला कि वे सरकारी नौकरी में नहीं हैं, जबकि हकीकत यह है कि वे बेमचा स्कूल में व्याख्याता (एलबी) के पद पर कार्यरत हैं। फर्जी तरीके से बीपीएल कैटेगरी में नाम शामिल करवाकर उन्होंने न केवल खुद, बल्कि पूरे परिवार को इस मुफ्त यात्रा का टिकट दिलवाया। यह सीधे-सीधे शासन के साथ छलावा और धोखाधड़ी है, जो छत्तीसगढ़ सिविल सेवा आचरण नियमों का खुला उल्लंघन है। इस घोटाले का पर्दाफाश करने वाले छत्तीसगढ़ नागरिक कल्याण समिति के सदस्य एवं पूर्व पार्षद पंकज साहू ने तुरंत एक्शन लिया। उन्होंने मुख्य सचिव (स्कूल शिक्षा विभाग), संचालक लोक शिक्षण, कलेक्टर महासमुंद और जिला शिक्षा अधिकारी को विस्तृत पत्र लिखा। पत्र में आरटीआई से प्राप्त साक्ष्यों की प्रमाणित कॉपियां भी जोड़ी गईं – जिसमें किरण पटेल का आवेदन, झूठा शपथ पत्र और यात्रियों की पूरी लिस्ट शामिल है। साहू ने साफ कहा, "ऐसे लोग वास्तविक गरीब बुजुर्गों का हक मार रहे हैं। यह सिर्फ अनुचित लाभ नहीं, बल्कि आपराधिक कृत्य है।" साहू की मांगें बेहद सख्त हैं: श्रीमती पटेल को तत्काल निलंबित किया जाए। विभागीय जांच के बाद सेवा से बर्खास्तगी। धोखाधड़ी और छल के लिए महासमुंद थाने में एफआईआर दर्ज हो। यह मामला स्थानीय स्तर पर आग की तरह फैल रहा है। लोग सवाल उठा रहे हैं – योजना की जांच-पड़ताल इतनी ढीली कैसे? अपात्र लोग कैसे घुसपैठ कर रहे हैं? सामाजिक कार्यकर्ता इसे सरकारी योजनाओं में बढ़ते भ्रष्टाचार का जीता-जागता सबूत बता रहे हैं। अगर ऐसे मामलों पर सख्ती नहीं हुई, तो गरीब बुजुर्गों का सपना हमेशा अधूरा रह जाएगा। समाज कल्याण विभाग और शिक्षा विभाग के अधिकारी अभी चुप हैं, लेकिन सूत्र बता रहे हैं कि शिकायत पर जांच शुरू हो सकती है। अगर आरोप साबित हुए, तो यह शिक्षिका के करियर पर तो ग्रहण लगेगा ही, साथ ही योजना की पूरी व्यवस्था पर भी बड़ा सवालिया निशान लग जाएगा। अब नजरें अधिकारियों पर टिकी हैं – क्या शासन इस "तीर्थ घोटाले" पर कड़ी कार्रवाई करेगा, या मामला दब जाएगा..? वास्तविक हकदारों की आवाज को न्याय मिलेगा या नहीं? आने वाले दिन बताएंगे, लेकिन फिलहाल महासमुंद में यह मामला गरम है..!
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