सिरपुर की प्राचीन धरोहर को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का संकल्प केंद्रीय मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत का दौरा - Bebaak Bayan

Breaking

Home Top Ad

Responsive Ads Here

Post Top Ad

Responsive Ads Here

Thursday, January 1, 2026

सिरपुर की प्राचीन धरोहर को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का संकल्प केंद्रीय मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत का दौरा

 

पुरातत्व स्थलों के संरक्षण से पर्यटन को मिलेगा मजबूत आधार

केंद्रीय मंत्री शेखावत सिरपुर की सांस्कृतिक विरासत पर गर्व यहां आकर अनुभव हो रहा गौरव – केंद्रीय मंत्री शेखावत

रिपोर्टर मयंक गुप्ता महासमुंद, 01 जनवरी 2026: भारत सरकार के संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में बसे प्राचीन सिरपुर स्थल का दौरा कर इसके पुरातात्विक महत्व को राष्ट्रीय पटल पर उभारने का आह्वान किया। उनके साथ छत्तीसगढ़ के विजय शर्मा और राज्य के संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल भी शामिल रहे। दौरा शुरू होते ही सिरपुर हेलीपैड पर मंत्री शेखावत का भव्य स्वागत हुआ। महासमुंद सांसद रूपकुमारी चौधरी, विधायक योगेश्वर राजू सिन्हा, कलेक्टर विनय कुमार लंगेह, पुलिस अधीक्षक प्रभात कुमार तथा स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने पुष्पगुच्छ भेंटकर उनका स्वागत किया। यह स्वागत न केवल औपचारिक था, बल्कि सिरपुर की समृद्ध विरासत के प्रति समर्पण का प्रतीक भी था। केंद्रीय मंत्री ने सिरपुर के प्रमुख ऐतिहासिक स्थलों का गहन अवलोकन किया। लक्ष्मण मंदिर की भव्यता से लेकर आनंद प्रभु कुटी विहार की शांतिमय वास्तुकला, तीवरदेव विहार के बौद्ध अवशेषों, सुरंग टीला की रहस्यमयी संरचनाओं और स्थानीय हाट बाजार की जीवंतता तक – हर स्थान पर उन्होंने विस्तार से जांच की। सिरपुर को भारत की सांस्कृतिक धरोहर का एक चमकदार रत्न बताते हुए मंत्री शेखावत ने कहा कि इसकी ऐतिहासिकता को वैश्विक मंच पर प्रदर्शित करने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएंगे। निरीक्षण के क्रम में संरक्षण कार्यों की समीक्षा करते हुए उन्होंने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए। पुरातत्व स्थलों की मूल संरचना को अक्षुण्ण रखते हुए आधुनिक सुविधाओं का समावेश सुनिश्चित करने पर बल दिया गया। पर्यटकों के लिए उन्नत सड़कें, स्पष्ट साइन बोर्ड, सूचना केंद्र, स्वच्छता अभियान और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं को प्राथमिकता देने की बात कही गई। मंत्री ने जोर देकर कहा कि बेहतर कनेक्टिविटी से सिरपुर पर्यटन का एक प्रमुख केंद्र बनेगा, जो आर्थिक समृद्धि का वाहक भी होगा। सिरपुर पहुंचने पर अपनी भावनाओं को व्यक्त करते हुए मंत्री शेखावत ने कहा, "यहां आकर गौरव की अनुभूति हो रही है।" उन्होंने सिरपुर को यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में शामिल करने के प्रयासों को तेज करने का भरोसा दिलाया। यह प्राचीन नगरी हमारी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक परंपराओं का जीवंत उदाहरण है, जिसके संरक्षण से नई पीढ़ियां प्रेरित होंगी। दौरे के अंतिम चरण में उन्होंने गंधेश्वर मंदिर जाकर गंधेश्वर महादेव की पूजा-अर्चना की। इस दौरान देश की समृद्धि और सांस्कृतिक उन्नति की कामना की गई, जो सिरपुर के धार्मिक महत्व को और उजागर करती है।

राज्य स्तर पर सिरपुर विकास की मजबूत योजना

उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने अवसर का लाभ उठाते हुए कहा कि राज्य सरकार केंद्र के सहयोग से सिरपुर को पर्यटन हब के रूप में विकसित करने के लिए कटिबद्ध है। इससे न केवल पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी, बल्कि स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे। उन्होंने भोरमदेव कॉरिडोर के शुभारंभ की घोषणा की, जो सिरपुर को और अधिक सुलभ बनाएगा। सांसद रूपकुमारी चौधरी और विधायक योगेश्वर राजू सिन्हा ने सिरपुर को वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर स्थापित करने के लिए रचनात्मक सुझाव दिए। इनमें स्थानीय कारीगरों को बढ़ावा, सांस्कृतिक उत्सवों का आयोजन और डिजिटल प्रचार शामिल थे।

सिरपुर प्राचीनता का अनमोल खजाना

प्राचीन श्रीपुर या श्रिपुरा के नाम से जाना जाने वाला सिरपुर महानदी के किनारे बसा एक ऐतिहासिक शहर है। 5वीं से 12वीं शताब्दी तक फला-फूला यह स्थल दक्षिण कोसल का राजनीतिक, धार्मिक और सांस्कृतिक केंद्र रहा। यहां हिंदू, बौद्ध तथा जैन परंपराओं के अद्भुत मिश्रण के प्रमाण मिलते हैं। पुरातत्व खुदाई से 22 शिव मंदिर, 5 विष्णु मंदिर, 10 बौद्ध विहार और 3 जैन विहार के अवशेष सामने आए हैं, जो इसकी धार्मिक समन्वय की कहानी बयां करते हैं।

लक्ष्मण मंदिर का प्रेम और भक्ति का प्रतीक

6वीं-7वीं शताब्दी का यह विष्णु मंदिर लाल ईंटों की अनूठी कृति है। रानी वासटादेवी ने इसे अपने पति राजा हर्षगुप्त की स्मृति में बनवाया, जो प्रेम की एक मार्मिक कथा का प्रतीक है।

आनंद प्रभु कुटी विहार की शांति की छवि

भिक्षु आनंद प्रभु द्वारा स्थापित यह 14 कमरों वाला बौद्ध मठ नक्काशीदार स्तंभों और बुद्ध की भव्य मूर्तियों से सजा है। ध्यान और शिक्षा का केंद्र रहा यह विहार आज भी आध्यात्मिक ऊर्जा का स्रोत है।

तीवरदेव विहार: बौद्ध दर्शन का जीवंत प्रमाण

7वीं-8वीं शताब्दी का यह ईंटों से निर्मित विहार बौद्ध अनुयायियों की धार्मिक क्रियाओं का साक्षी है। खुदाई से प्राप्त अवशेष इसकी भव्यता का वर्णन करते हैं।

सुरंग टीला की रहस्यमयी संरचना

7वीं शताब्दी का यह मंदिर पांच गर्भगृहों वाला अनोखा स्थल है। शिवलिंग और गणेश प्रतिमाओं की उपस्थिति यहां की धार्मिक विविधता को प्रमाणित करती है। यह दौरा सिरपुर के पुनरुद्धार की दिशा में एक मील का पत्थर साबित हो रहा है। केंद्र-राज्य सहयोग से यह प्राचीन नगरी जल्द ही पर्यटकों का प्रमुख आकर्षण बनेगी, जो हमारी सभ्यता की गाथा को नई पीढ़ियों तक पहुंचाएगी।

No comments:

Post a Comment

Post Bottom Ad

Responsive Ads Here

Pages