जेल की सलाखों से बाहर आए कवासी लखमा: बस्तर के 'शेर' की वापसी पर भावुक हुए समर्थक, पत्नी बोलीं- "उनके बिना सूख कर कांटा हो गई थी" - Bebaak Bayan

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Wednesday, February 4, 2026

जेल की सलाखों से बाहर आए कवासी लखमा: बस्तर के 'शेर' की वापसी पर भावुक हुए समर्थक, पत्नी बोलीं- "उनके बिना सूख कर कांटा हो गई थी"

रायपुर/बस्तर | 05 फरवरी 2026 छत्तीसगढ़ की राजनीति के सबसे कद्दावर और चर्चित चेहरों में से एक, पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा आखिरकार एक लंबे अंतराल के बाद जेल से बाहर आ गए हैं। लगभग एक साल तक न्यायिक हिरासत में रहने के बाद जब लखमा जेल के मुख्य द्वार से बाहर निकले, तो उनके समर्थकों का सैलाब उमड़ पड़ा। ढोल-नगाड़ों और पारंपरिक बस्तरिया वाद्ययंत्रों की गूंज के बीच लखमा का स्वागत किसी उत्सव जैसा रहा, लेकिन इस पूरी गहमागहमी के बीच सबसे मार्मिक तस्वीर उनकी पत्नी के साथ मुलाकात की रही।

"हर दिन पहाड़ जैसा कटा": पत्नी का छलका दर्द

कवासी लखमा की रिहाई पर उनकी पत्नी सुलोचना (बदला हुआ नाम) अपनी भावनाओं को रोक नहीं पाईं। उन्होंने मीडिया से बात करते हुए अपनी शारीरिक और मानसिक पीड़ा का जिक्र किया।

"पिछले एक साल से घर सूना पड़ा था। जब से वे जेल गए, मुझे न भूख लगती थी और न नींद आती थी। उनकी रिहाई की चिंता ने मुझे अंदर से खोखला कर दिया था। लोग कहते हैं मैं बहुत दुबली हो गई हूँ, पर सच तो यह है कि उनके बिना मेरी दुनिया ही थम गई थी। आज घर में फिर से चूल्हा खुशियों के साथ जलेगा।"कवासी लखमा की पत्नी

जेल से निकलते ही दिखा वही पुराना अंदाज

सफेद धोती-कुर्ता और गले में गमछा डाले कवासी लखमा जब बाहर आए, तो उनकी ऊर्जा में कोई कमी नहीं दिखी। उन्होंने मीडिया से संक्षिप्त बात करते हुए कहा कि उन्हें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा था और वे बस्तर की जनता की सेवा के लिए फिर से तैयार हैं।

घटनाक्रम की बड़ी बातें:

  • लंबी कानूनी लड़ाई: लखमा को कथित अनियमितताओं के मामले में पिछले साल हिरासत में लिया गया था। कई बार जमानत याचिका खारिज होने के बाद अब उन्हें राहत मिली है।

  • बस्तर में जश्न: सुकमा और बीजापुर के कई गांवों में ग्रामीणों ने लखमा की रिहाई पर नाच-गाकर अपनी खुशी जाहिर की।

  • सियासी हलचल: लखमा की वापसी के साथ ही छत्तीसगढ़ कांग्रेस में फिर से जान फूँकने की उम्मीद जताई जा रही है, खासकर आदिवासी अंचलों में उनका प्रभाव चुनाव परिणामों को प्रभावित करने की ताकत रखता है।

ग्राउंड जीरो से विश्लेषण

राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि कवासी लखमा की रिहाई केवल एक व्यक्ति की रिहाई नहीं है, बल्कि यह बस्तर की राजनीति का एक टर्निंग पॉइंट है। लखमा का "देसी अंदाज" और सीधा संवाद उन्हें जनता के बीच लोकप्रिय बनाता है। जेल में बिताए समय ने उन्हें सहानुभूति की एक नई लहर भी दी है, जिसका फायदा आने वाले समय में पार्टी को मिल सकता है।

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